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इंग्लैण्ड की क्रान्ति के परिणामों का वर्णन कीजिए।याइंग्लैण्ड की क्रान्ति ने विश्व इतिहास को कहाँ तक प्रभावित किया ?याइंग्लैण्ड की गौरवपूर्ण क्रान्ति (1688 ई०) के दो परिणाम लिखिए।याइंग्लैण्ड की क्रान्ति को गौरवपूर्ण क्रान्ति’ की संज्ञा क्यों दी गयी है ? इसके प्रमुख परिणामों को वर्णित कीजिए।याइंग्लैण्ड के इतिहास में रक्तहीन क्रान्ति किस प्रकार एक युगान्तकारी घटना थी ?

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इंग्लैण्ड की क्रान्ति इतिहास में गौरवपूर्ण क्रान्ति के नाम से इसलिए प्रसिद्ध है, क्योंकि बिना खून की एक बूंद बहाये तथा बिना युद्ध लड़े इंग्लैण्ड में जेम्स द्वितीय के निरंकुश शासन का अन्त करके संसद की सत्ता स्थापित कर दी गयी।

इंग्लैण्ड की क्रान्ति के परिणाम (प्रभाव)

इंग्लैण्ड के इतिहास में इस क्रान्ति का बहुत महत्त्वपूर्ण स्थान है। इस क्रान्ति के विश्व-इतिहास पर भी बड़े दूरगामी व व्यापक परिणाम हुए, जो निम्नवत् हैं –

1. राजा के दैवी अधिकारों का अन्त – क्रान्ति से पूर्व इंग्लैण्ड के अधिकांश सम्राट ‘राजा के दैवी अधिकारों के सिद्धान्त में विश्वास करते आ रहे थे। वे अपने को पृथ्वी पर ईश्वर का प्रतिनिधि मानने के साथ-साथ यह भी मानते थे कि राजा को अपनी स्वेच्छा से शासन करने का अधिकार था। इस क्रान्ति ने यह स्पष्ट कर दिया कि राजा का पद जनता की इच्छा पर निर्भर करता है, न कि दैवी अधिकार पर।

2. संसद की सर्वोच्चता की स्थापना – इंग्लैण्ड में गौरवपूर्ण क्रान्ति की सफलता के पश्चात् संसद की सर्वोच्चता स्थापित हो गयी। इससे यह सिद्ध हो गया कि जनता की प्रतिनिधि संसद की शक्ति अधिक है और राजा को संसद की इच्छा के अनुसार ही शासन करना चाहिए।

3. राजा और संसद के संघर्ष का अन्त – गौरवपूर्ण क्रान्ति के पश्चात् राजा और संसद के संघर्ष का अन्त हो गया, जिससे इंग्लैण्ड के आर्थिक विकास की गति में तेजी आ गयी।

4. राजा की निरंकुशता पर प्रतिबन्ध संसद ने 1689 ई० में बिल ऑफ राइट्स पारित करके राजा की निरंकुशता पर अंकुश लगा दिया। निरंकुशता समाप्त होने पर स्वतन्त्रता और समानता के आदर्शों की स्थापना की गयी। इस बिल के द्वारा यह निश्चित कर दिया गया कि इंग्लैण्ड में प्रोटेस्टेण्ट धर्म का अनुयायी ही राजा बन सकेगा।

5. स्वतन्त्र न्यायपालिका की स्थापना – इंग्लैण्ड में क्रान्ति की सफलता के पश्चात् न्यायपालिका की स्थापना की गयी। अब न्यायाधीश स्वतन्त्र हो गये थे, क्योंकि न्यायाधीशों पर राजा का कोई नियन्त्रण नहीं रहा।

6. यूरोप में क्रान्तियों का प्रचलन – इंग्लैण्ड की गौरवपूर्ण क्रान्ति की सफलता से प्रोत्साहित होकर यूरोप में राजनीतिक क्रान्तियों की एक श्रृंखला प्रारम्भ हो गयी।

7. इंग्लैण्ड और फ्रांस में विरोध – फ्रांस यूरोप में कैथोलिक धर्म का नेतृत्व कर रहा था; अतः जेम्स द्वितीय के साथ फ्रांस के मधुर सम्बन्ध थे, परन्तु इंग्लैण्ड में प्रोटेस्टेण्ट धर्म की मान्यता स्थापित हो जाने से इंग्लैण्ड और फ्रांस के सम्बन्धों में कटुता उत्पन्न हो गयी।

8. इंग्लैण्ड की विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति – गौरवपूर्ण क्रान्ति के पश्चात् इंग्लैण्ड ने औपनिवेशिक, राजनीतिक आदि क्षेत्रों में पर्याप्त प्रगति की। प्रशासन ने देश के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास की ओर ध्यान दिया।

9. इंग्लैण्ड में संसदीय शासन का विकास – उन्नीसवीं सदी में इंग्लैण्ड में संसदीय शासन प्रणाली का तेजी से विकास हुआ। सन् 1832 ई० में पहला सुधार अधिनियम पारित हुआ, जिससे लोगों को मताधिकार प्राप्त हुआ। सन् 1867 ई०, 1884-85 ई० तथा 1911 ई० में इंग्लैण्ड में सभी वयस्क पुरुषों को मताधिकार मिल गया। सन् 1918 ई० में इंग्लैण्ड में महिलाओं को भी मताधिकार प्राप्त हो गया। इस प्रकार इंग्लैण्ड में संसदीय शासन मजबूती से स्थापित हो गया और ब्रिटिश संसद संसार की ‘संसदों की जननी’ कही जाने लगी।



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