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इंग्लैण्ड की क्रान्ति के प्रमुख कारणों पर प्रकाश डालिए।याइंग्लैण्ड में 1688 ई० में होने वाली गौरवपूर्ण अथवा रक्तहीन क्रान्ति के प्रमुख कारण क्या थे ? वर्णन कीजिए।याइंग्लैण्ड की क्रान्ति के क्या कारण थे ?

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इंग्लैण्ड की क्रान्ति के कारण

इंग्लैण्ड की क्रान्ति विश्व इतिहास में ‘गौरवपूर्ण क्रान्ति’, ‘शानदार क्रान्ति’, ‘रक्तहीन क्रान्ति तथा महान् क्रान्ति’ नामों से प्रसिद्ध है। इसे शानदार क्रान्ति’ इसलिए कहा जाता है, क्योंकि इसके द्वारा बिना खून की एक बूंद बहाये तथा बिना युद्ध लड़े इंग्लैण्ड में निरंकुश शासन का अन्त करके संसद की सत्ता स्थापित कर दी गयी। इंग्लैण्ड की रक्तहीन क्रान्ति 1688 ई० में राजा जेम्स द्वितीय के शासनकाल (सन् 1685-88 ई०) में हुई थी। जेम्स द्वितीय भी अपने पिता की तरह ही अहंकारी, हठी और निरंकुश शासक था। फलस्वरूप उसके शासनकाल के तीसरे वर्ष में ही क्रान्ति का आरम्भ हो गया।इस क्रान्ति के प्रमुख कारण निम्नलिखित

1. कैथोलिकों के प्रति उदारता – जेम्स द्वितीय कैथोलिक धर्म का अनुयायी था। इसलिए वह प्रोटेस्टेण्ट धर्म के लोगों की अपेक्षा कैथोलिकों के प्रति पक्षपात करता था और उनके प्रति उदारता का व्यवहार करता था। उसने कैथोलिकों को सेना में उच्च पदों पर नियुक्त किया। इन नियुक्तियों को ब्रिटिश संसद ने अवैध घोषित कर दिया। इस पर जेम्स द्वितीय ने संसद को ही भंग कर दिया। संसद को भंग करने के पश्चात् जेम्स द्वितीय का साहस बढ़ता ही गया और उसने मनमाने ढंग से अन्य उच्च सरकारी पदों पर भी कैथोलिकों की नियुक्तियाँ कीं। इससे जनता के मन में जेम्स द्वितीय के विरुद्ध भावना पैदा हुई।

2. कोर्ट ऑफ हाईकमीशन की स्थापना – संसद को भंग करने के बाद जेम्स द्वितीय ने कैथोलिकों की नियुक्तियों को वैधानिक बनाने के लिए कोर्ट ऑफ हाईकमीशन की स्थापना की। संसद ने इस प्रकार की संस्थाओं और न्यायालयों की स्थापना पर रोक लगा रखी थी, क्योंकि ये सभी राजाओं की निरंकुशता की प्रतीक थीं। जेम्स द्वितीय ने संसद की परवाह न करते हुए कोर्ट ऑफ हाई कमीशन के माध्यम से कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के चांसलर और लन्दन के बिशप को पदच्युत करके उनके स्थान पर कैथोलिकों की नियुक्ति करवा दी। जेम्स द्वितीय के इस कार्य से इंग्लैण्ड की प्रोटेस्टेण्ट जनता बहुत असन्तुष्ट हो गयी और राजा को हटाने की सोचने लगी।

3. कानूनों का स्थगन ( रद्द करना) – जेम्स द्वितीय ने 1687 ई० में इंग्लैण्ड के कैथोलिकों पर नियन्त्रण लगाने वाले अन्य अनेक कानूनों को भी रद्द कर दिया। इन कानूनों में क्लैरेण्डन कोड, टेस्ट ऐक्ट तथा चर्च सम्बन्धी कानून प्रमुख थे। इन कानूनों के स्थगन से कैथोलिकों को सरकारी पद प्राप्त करने और धार्मिक कार्यों का सम्पादन करने की पूर्ण स्वतन्त्रता प्राप्त हो गयी। जनता को राजा की ये बाते बहुत बुरी लगीं।

4. धार्मिक घोषणा – जेम्स द्वितीय ने 1768 ई० में एक घोषणा करते हुए पादरियों को आदेश दिया कि वे उसके द्वारा की गयी कैथोलिक धर्म सम्बन्धी घोषणाओं को चर्च में पढ़कर सुनायें। जेम्स द्वितीय को यह आदेश इंग्लैण्ड के चर्च के विरुद्ध था; अत: ब्रिटिश जनता में रोष फैल गया और वह उत्तेजित हो उठी।.

5. सात बिशपों पर अभियोग – जेम्स द्वितीय के आदेश की तीखी प्रतिक्रिया हुई। कैण्टरबरी के आर्क बिशप और छह अन्य बिशपों ने राजा के पास एक आवेदन-पत्र भेजा जिसमें उन्होंने राजा से विनती की कि उन्हें अनुचित घोषणाएँ पढ़ने को बाध्य ने किया जाए। इस पर जेम्स द्वितीय ने क्रोधित होकर सातों बिशपों को बन्दी बना लिया और उन पर राजद्रोह के अपराध में मुकदमा चलाया गया। इस घटना ने इंग्लैण्ड में क्रान्ति का वातावरण तैयार कर दिया।

6. हॉलैण्ड के राजा के विचार – हॉलैण्ड के राजा विलियम ऑफ ऑरेन्ज ने अपने एक लेख में विचार प्रकट किया कि कैथोलिकों को धार्मिक स्वतन्त्रता कभी नहीं मिलनी चाहिए। इस विचार से इंग्लैण्ड की जनता बहुत प्रसन्न हुई तथा जेम्स द्वितीय के और अधिक विरुद्ध हो गयी।

7. अन्य कारण – जेम्स द्वितीय के पक्षपातपूर्ण कार्यों तथा दमन-नीति ने इंग्लैण्ड में क्रान्ति की लहर उत्पन्न कर दी। 12 जून, 1688 ई० को राजा जेम्स के यहाँ पुत्र के जन्म की सूचना ने क्रान्ति को अनिवार्य बना दिया; क्योंकि जनता यह सोचने लगी कि अब इंग्लैण्ड में कैथोलिक राजवंश ही सदैव के लिए स्थायी हो जाएगा।



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