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इतिहासों की सामूहिक गति सहसा झूठी झू पड़ जाने पर क्या जाने सच्चाई टूटे हुए पहियों का आश्रय ले! -इन पंक्तियों से कवि क्या बताना चाहते हैं? |
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Answer» कवि कहते हैं कि पहिया यदि टूटा है तो भी उसे मत फेंको। यह संसार एक दुरूह चक्रव्यूह है। बड़े-बड़े महारथी असत्यों और अन्यायों की अक्षौहिणी सेनाओं को खड़ा करेंगे। उन महारथियों के कारण इतिहास की गति सहसा झूठी झू पड़ जाती है तो सच्चाई को टूटे पहिए का सहारा लेना पड़ेगा। इसलिए टूटे पहिए की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए। |
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