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जापान के आधुनिकीकरण का संक्षेप में वर्णन कीजिए। या “जापान का आधुनिकीकरण दक्षिण-पूर्वी एशिया के इतिहास की एक महत्त्वपूर्ण घटना थी।” व्याख्या कीजिए।

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जापान का आधुनिकीकरण मेजी पुनस्र्थापना के बाद जापान में आधुनिकीकरण की भावना का बड़ी तेजी के साथ विकास हुआ। जापान ने राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक तथा सांस्कृतिक आदि सभी क्षेत्रों के पश्चिमी विचारों और सिद्धान्तों को अपना लिया। इस प्रकार जापान का आधुनिकीकरण विश्व के इतिहास की एक महत्त्वपूर्ण घटना बन गई। जापान में आधुनिकीकरण की भावना का प्रसार होने का सबसे महत्त्वपूर्ण कारण यह था कि जापानी लोग पश्चिमी ज्ञान-विज्ञान को सीखकर अपने देश को इतना अधिक शक्तिशाली बनाना चाहते थे जिससे वह पश्चिमी देशों का सामना कर सकें। जापान अपने को चीन के समान केवल भाग्य पर छोड़ने के लिए तैयार नहीं था, इसलिए जापान ने बड़ी तेजी के साथ अपना आधुनिकीकरण किया।

1. सेना का आधुनिकीकरण :
मेजी युग से पूर्व जापान की सेना का संगठन समुराई लोगों द्वारा | होता था और ये समुराई विभिन्न सामन्तों की सेवा में रहकर कार्य किया करते थे। मेजी युग में शाही उद्घोषणा में इस प्राचीन प्रणाली का परित्याग कर दिया गया और सभी व्यक्तियों को सेना में भर्ती होने का अवसर प्रदान किया गया। सन् 1872 ई० में जापान में अनिवार्य सैनिक सेवा लागू कर दी गई और सभी के लिए यह आवश्यक कर दिया गया कि वे सैनिक शिक्षा प्राप्त करें और एक निश्चित अवधि तक सैनिक जीवन व्यतीत करें। वास्तव में, यह एक क्रान्तिकारी कदम था। इसके द्वारा सभी व्यक्तियों को सेना में बिना किसी भेदभाव के उच्च पद प्राप्त करने का ‘अवसर प्राप्त हुआ।

2. शिक्षा का आधुनिकीकरण :
जापान में शिक्षा का भी आधुनिकीकरण हुआ। लाखों की संख्या में जापानी छात्र शिक्षा प्राप्त करने के लिए यूरोप तथा अमेरिका गए। उन्होंने अपने देश लौटकर शिक्षा के क्षेत्र में क्रान्ति उत्पन्न कर दी। अभी तक जापान में मुख्य रूप प्राचीन साहित्य व धर्म ग्रन्थों की शिक्षा प्रदान की जाती थी परन्तु अब जापानी शिक्षा में पश्चिमी ज्ञान-विज्ञान को भी स्थान दिया जाने लगा। लगभग सभी जापानी स्कूलों में अंग्रेजी भाषा अनिवार्य रूप से पढ़ाई जाने लगी। 1872 ई० में जापान में अनिवार्य शिक्षा पद्धति को लागू किया गया और इसकी पूर्ति के लिए जापान के प्रत्येक ग्राम तथा नगर में प्राथमिक स्कूलों की स्थापना की गई।

प्रत्येक बालक व बालिका के लिए कम-से-कम 4 वर्ष तक शिक्षा प्राप्त करना अनिवार्य कर दिया गया। जापानी स्कूलों में राष्ट्र-प्रेम की शिक्षा देने की विशेष व्यवस्था की गई। 1902 ई० के बाद स्त्रियों की उच्च शिक्षा की पर्याप्त व्यवस्था की गई। क्लाइड के अनुसार, पुरुषों के लिए विश्वविद्यालय आरम्भ करने में जापान ने फ्रांसीसी नमूना अपनाने की प्रवृत्ति दिखाई और सारी शिक्षा प्रणाली पर रोजगार सम्बन्धी प्रशिक्षण के जर्मन सिद्धान्त की छाप पड़ गई थी। किसी भी दृष्टि से देखने पर यह निश्चित है कि वह शिक्षा में एक बड़ी क्रान्ति थी। 1867-71 ई० की राजनीति और आर्थिक क्रान्ति से इसका महत्त्व कुछ कम नहीं है।

जापानी शिक्षा के सम्बन्ध में क्लाइड ने आगे लिखा है-“इसलिए शिक्षा निश्चित प्रयोजनों तक सीमित रही। राष्ट्रीय एकता, निर्विवाद निष्ठा, आधुनिक वैज्ञानिक और आर्थिक प्रणालियों के ज्ञान और राष्ट्रीय सुरक्षा की पूर्णता।” इस प्रकार राष्ट्रीय एकता एवं सुरक्षा, देशभक्ति, आर्थिक तथा व्यावसायिक उन्नति जापान की शिक्षा प्रणाली का उद्देश्य था। इस प्रकार शिक्षा के क्षेत्र में क्रान्तिकारी परिवर्तन करके जापान आधुनिकीकरण की ओर अग्रसर हुआ।

3. राजनीति का आधुनिकीकरण :
राजनीतिक जीवन में भी जापान ने आधुनिकीकरण का अनुसरण 1868 ई० में शोगुनों के शासन का अन्त करके शासन सत्ता को अपने हाथ में लेकर किया। सम्राट मेजी ने जो घोषणा-पत्र प्रकाशित किया था, उसमें शासन के नवीन सिद्धान्तों का प्रतिपादन किया गया था और यह भी कहा गया था कि शासन की समस्त शक्ति सम्राट के हाथ में रहेगी परन्तु जापान में एक विचार सभा’ की स्थापना की जाएगी, जिसकी सम्मति और परामर्श के अनुसार राज्य की नीति का निर्धारण किया जाएगा। इस सभा में लोकमत को विशेष स्थान दिया जाएगा।
इसके बाद जापान में शासन में सुधार करने के लिए आन्दोलन होने लगे और वैधानिक शासन की स्थापना करने का प्रयास किया जाने लगा। 1874 ई० में इतागाकी और उसके समर्थकों ने सम्राट की सेवा में एक आवेदन-पत्र भेजा, जिसमें यह प्रार्थना की गई कि 1868 ई० की घोषणा के अनुसार जापान में एक विचार सभा की स्थापना की जाए और यह सभा लोकमत का प्रतिनिधित्व करे। इतागाकी के उदार दल ने जापान में संसद की स्थापना और पश्चिमी देशों के अनुकरण पर लोकतन्त्रवाद के विकास का समर्थन किया। 1881 ई० में काउण्ट तोकूमी ने जापान में एक नए दल को संगठन किया और वैधानिक शासन स्थापित करने की जोरदार माँग की।

इस स्थिति में जापान के सम्राट ने यह अनुभव किया कि देश में शासन सुधार करना आवश्यक है; अतः 1881 ई० में सम्राट ने एक घोषणा प्रकाशित करवाई जिसमें यह आश्वासन दिया गया कि 1890 ई० तक जापान में संसद की स्थापना कर दी जाएगी। 1889 ई० में सम्राट ने जापान के नए संविधान की घोषणा कर दी। इस संविधान के अनुसार सम्राट को शासन का प्रधान बनाया गया और उसे विस्तृत अधिकार दिए गए। एक मन्त्रिमण्डल के गठन की व्यवस्था की गई, जिसे सम्राट के प्रति उत्तरदायी बनाया गया। एक संसद की स्थापना की गई, जिसके दो सर्दन रखे गए और जिसकी अवधि 7 वर्ष निश्चित की गई। 1889 ई० के संविधान द्वारा जापान को शासन काफी आधुनिक हो चुका था।

4. औद्योगिक क्षेत्र का आधुनिकीकरण :
उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य तक जापान के उद्योगों की स्थापना आदि की ओर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया था और इस कारण इस क्षेत्र में वह कोई विशेष उन्नति न कर सका था। मेजी सरकार ने जापान का औद्योगीकरण करने की दिशा में विशेष ध्यान दिया। 1890 ई० में जापान में भाप-शक्ति से चलने वाले कारखानों की संख्या 250 तक पहुँच गई। इसके बाद जापान का तेजी के साथ औद्योगीकरण प्रारम्भ हुआ। 1905 ई० तक जापान औद्योगीकरण के क्षेत्र में बहुत आगे बढ़ गया। 1905 ई० तक जापान संसार के सबसे उन्नत व्यवसाय और व्यापार प्रधान देशों में स्थान प्राप्त कर चुका था। अब जापान औद्योगिक क्षेत्र में बहुत तेजी के साथ आधुनिकीकरण की ओर बढ़ने लगा था।

5. सामाजिक क्षेत्र का आधुनिकीकरण : 
जापान के सामाजिक जीवन में भी आधुनिकीकरण का प्रवेश हुआ। जापान के लोगों ने अपने समाज का संगठन यूरोपीय ढंग पर करना शुरू कर दिया। उन्होंने पाश्चात्य लोगों के रहन-सहन, व्यवहार तथा पहनावे की नकल करनी आरम्भ कर दी। सामन्तशाही, जोकि जापान की प्राचीन व्यवस्था की प्रतीक थी, का अन्त कर दिया गया। सरकार ने समाज-सुधार की ओर विशेष ध्यान दिया। 1905 ई० में एक खान नियम पारित किया गया। 1911 ई० में एक फैक्टरी नियम पारित किया गया। इसके अनुसार, रोजगार प्राप्त करने की आयु 12 वर्ष निश्चित कर दी गई। 1921 ई० में सामाजिक ब्यूरो की गृह विभाग के अन्तर्गत स्थापना की गई।

कारखानों में स्त्रियों और बच्चों के कार्य करने के 10 घण्टे निश्चित कर दिए। गए। 1929 ई० में 11 बजे रात के बाद स्त्रियों तथा बच्चों का काम करना अवैध घोषित कर दिया गया। इसके साथ-ही-साथ जापान के समाचार-पत्रों ने समाज का आधुनिकीकरण करना शुरू कर दिया सिविल तथा सैनिक न्यायिक नियमों को पश्चिमी ढंग पर निर्मित किया गया। इसके अतिरिक्त, धार्मिक जीवन का भी आधुनिकीकरण आरम्भ हुआ। 19वीं शताब्दी के अन्त तक जापान में ईसाई धर्म का व्यापक प्रचार हुआ। इस प्रकार स्पष्ट है कि जापान का आधुनिकीकरण दक्षिण-पूर्वी एशिया के इतिहास की एक महत्त्वपूर्ण घटना है।”



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