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जाति प्रथा एक अभिशाप है’ – विषय पर आलेख तैयार करें और संगोष्ठी चलाएँ। |
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Answer» जाति प्रथा : एक सामाजिक अभिशाप जाति प्रथा समाज की एक विकट समस्या है। इसके कारण समाज में असमानता,एकाधिकार, विद्वेष आदि दोष उत्पन्न हो जाते हैं। जाति प्रथा की सबसे बड़ा दोष छुआछूत की भावना है। इसके कारण संकीर्णता की भावना का प्रसार होता है और सामाजिक राष्ट्री य एकता में बाधा आती है। जाति के नाम पर निम्न वर्ग के लोगों को कई प्रकार की यातनाएँ सहनी पड़ती हैं। उन्हें अपनी जिंदगी स्वतंत्र रूप से जीने में बाधा होती है। आम जगहों को इस्तेमाल करने से उनके लिए पाबंदी है। निम्न वर्ग के लोगों से छुआ पानी पीना, उनका बना भोजन खाना, रास्ते में दूसरों के सामने पड़ना आदि बातों को बुरा समझा जाता है। कई लोगों ने जाति प्रथा को समाप्त करने की बात की। भारत संविधान में जाति के आधार पर अवसर में भेदभाव करने पर रोक भी लगाई है। पिछली कई सदियों से पिछड़ी रही कई जातियों के उत्थान के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई। निम्न वर्ग के लोगों को इससे कई फायदा हुए। लेकिन जहाँ जाति व्यवस्था कायम है वहाँ नीच जाति वालों को एक तरह से आरक्षण के नाम पर उनकी नीचता की याद दिलाई जा रही है। असल में आरक्षण जहाँ पिछड़ी जातियों को अवसर दे रहा है, वहीं वे उन्हें ये एहसास भी याद करवाता है कि वे उपेक्षित हैं। कानूनी रोकथाम, शिक्षा में हुई उन्नति आदि के कारण इस कट्टरपन में थोड़ी सी कमी ज़रूर आई। लेकिन जाति प्रथा नए रूपों में वर्तमान है। विश्वविद्यालयों, शासक वर्गों, राजनीतिज्ञों आदि के बीच आज भी यह नए-नए रूप धरकर मौजूद है। अगर हम इसे सफल रूप से रोक न पाएँ तो हमारी सामाजिक उन्नति संभव नहीं होगी। |
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