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“जैसे मैं जानता न होऊँ।” सूबेदार हजारासिंह लहनासिंह के बारे में क्या जानता था?

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हजारासिंह जानता है कि लहनासिंह बोधासिंह का पूरा ध्यान रखता है। रात-रात भर जागकर उसकी जगह पहरा देता है। अपना कम्बल उसे ओढ़ा देता है और स्वयं सिगड़ी के सहारे ठण्डी रात बिता देता है। अपने सूखी लकड़ी के तख्तों पर उसे सुला देता है। वह खन्दक में कीचड़ में पड़ा रहता है। बोधासिंह के कराहने पर उसका हाल पूछता है, पानी पिलाता है। ठण्ड लगने पर अपना ओवरकोट और जरसी उसे पहना देता है। हजारासिंह लहनासिंह के इस त्याग और सेवा को अच्छी तरह जानता था।



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