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जनजातियों की समस्याओं के समाधान हेतु किये गये संवैधानिक प्रावधानों का विवरण दीजिए। |
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Answer» जनजातियों की समस्याओं के समाधान हेतु निम्नलिखित प्रावधान किये गये हैं भारतीय संविधान के अनुच्छेद 335 के अनुसार, सार्वजनिक सेवाओं और सरकारी नौकरियों में देश की जनजातियों के लिए स्थान सुरक्षित रखने का आश्वासन दिया गया है। अनुच्छेद 325 में कहा गया है कि किसी को भी धर्म, प्रजाति, जाति एवं लिंग के आधार पर मताधिकार से वंचित नहीं किया जाएगा। आदिवासियों के जन-प्रतिनिधियों के लिए लोकसभा व राज्य विधानसभाओं में अनुच्छेद 330 व 332 के अनुसार स्थान सुरक्षित कर दिये गये हैं। इन आरक्षित स्थानों पर जनजातियों एवं अनुसूचित जातियों के अतिरिक्त अन्य कोई चुनाव नहीं लड़ सकता। अनुच्छेद 338 में राष्ट्रपति द्वारा इनके लिए विशेष अधिकारी की नियुक्ति की व्यवस्था की गयी है। अनुच्छेद 342 व 344 में राज्यपालों को भारतीयों के सन्दर्भ में विशेष अधिकार प्रदान किये गये हैं। इसी प्रकार संविधान के अनुच्छेद 47 में राज्य का यह दायित्व माना गया है कि वह जनजातियों की शिक्षा की उन्नति और आर्थिक हितों की सुरक्षा की ओर विशेष ध्यान दे। इसी प्रकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164 में असम के अतिरिक्त ओडिशा, बिहार, मध्य प्रदेश आदि राज्यों में जनजातियों के कल्याण हेतु पृथक् मन्त्रालय स्थापित करने का प्रावधान किया गया है। इसी तरह से अनुच्छेद 224 (2) के अन्तर्गत असम की जनजातियों के लिए जिला और प्रादेशिक परिषदें स्थापित करने का प्रावधान किया गया है। |
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