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जनसंख्या शिक्षा के उद्देश्यों पर प्रकाश डालिए।

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भारत सरकार ने जनसंख्या सम्बन्धी नीतियों एवं कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से कार्यान्वित करने के लिए 1970 ई० में राष्ट्रीय स्तर पर एक ‘जनसंख्या शिक्षा कोष्ठ’ स्थापित किया। भारत ने संयुक्त राष्ट्र संघ की शाखा ‘यूनाइटेड नेशन्स फण्ड फॉर पॉपुलेशन एक्टीविटीज’ के सहयोग से जनसंख्या शिक्षा कार्यक्रम को देश में कार्यान्वित करने के लिए कदम उठाया, जिसके निम्नलिखित उद्देश्य हैं

⦁     जनसंख्या को नियन्त्रित करने के लिए हमें जनसाधारण में ऐसी चेतना का विकास करना है। जो व्यक्ति, समाज तथा राष्ट्र के लिए हितकारी हो।
⦁    जनसंख्या शिक्षा माध्यम के द्वारा हमें छात्र-छात्राओं को इस योग्य बनाना है कि जो भविष्य में यह निर्णय लेने में सक्षम हों कि उनके परिवार का क्या आकार होना चाहिए।
⦁    जनसंख्या शिक्षा के द्वारा राष्ट्र के समस्त निवासियों, विशेष रूप से छात्र-छात्राओं को विश्व के परिप्रेक्ष्य में अपने देश, राज्य एवं क्षेत्र की जनसंख्या स्थिति के सम्बन्ध में जानकारी देना है।
⦁    जनसंख्या शिक्षा के माध्यम से जनसाधारण को जनसंख्या में होने वाली वृद्धि के कारणों एवं कुप्रभावों को भी बताना है।
⦁     जनसंख्या शिक्षा के द्वारा जनसंख्या के सिद्धान्तों का ज्ञान तथा उन सिद्धान्तों का परिपालन्। करना भी बताया जाता है।
⦁    जनसाधारण को यह बताना कि प्राकृतिक साधनों एवं जनसंख्या का घनिष्ठ सम्बन्ध है और यदि जनसंख्या और प्राकृतिक संसाधनों का सन्तुलन ठीक है तो यह हमारे सुख का आधार हो सकता है।
⦁    जनसंख्या शिक्षा माध्यम के द्वारा मानव अधिकारों का ज्ञान कराना तथा व्यक्तियों में प्रेम और सहानुभूति की भावना का विकास करना।



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