1.

।) काँकर पाथर जोरि कै, मसजिद लई बनाय। ___ता चढ़ि मुल्ला बाँग दे, क्या बहरा हुआ खुदाय।।(क) कबीरदास ने मसजिद की क्या-क्या विशेषताएँ बताई हैं ?​

Answer»

: इस दोहे मे कबीर जी उन मुल्लों को बहरा बोल रहे हैं जिनको नमाज़ (इबादत) के लिये बांग लगानी पड़ती है, यह लोग खुद क्यों नही आते नमाज़ पढने (खुद- आय)? “का बहरा भया खुद आय”. मन मे तडप होनी चाहिये इबादत के लिये, बार-बार बांग लगा के पूजा क लिये बुलाना शायद कबीर जी को ठीक नहीं लगा होगा.



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