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काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए :क. किस दावानल की ज्वालाएँ हैं दीखीं ?ख. तेरे गीत कहावें वाह, रोना भी है मुझे गुनाह !देख्न विषमता तेरी-मेरी, बजा रही तिस पर रण भेरी !

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क. काव्य-सौंदर्य : कोयल असमय आधी रात को कूक उठती है। उसकी आवाज में कवि वेदना महसूस करता है। वह कोयल की वेदना का अनुमान लगाता है कि कहीं कोयल ने लोगों के अंदर भड़क उठी संघर्ष की आग की ज्वाला तो नहीं देख लिया है। पंक्ति की भाषा सरल एवं तत्सम युक्त है। ‘दायानल’ में रूपक अलंकार है और पंक्ति प्रश्न शैली में है।

ख. काव्य सौंदर्य : यहाँ कवि ने अपने और कोयल के जीवन का अंतर स्पष्ट किया है। कवि कहता है कि तेरे गीतों को लोग वाह-वाह कर सुनते हैं जबकि हमें रोने भी नहीं दिया जाता है। हमें चुपचाप पहरेदारों का अत्याचार सहना पड़ता है। इतना अंतर होने पर भी तू रणभेदी बजा रही है। काव्य-पंक्तियों में सरल भाषा का प्रयोग किया गया है। ‘रणभेरी बजाना’ जैसे मुहावरे के द्वारा भाषा में सजीवता आ गई है।



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