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काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्याएँ-किन्तु यह झंझट भारी, युद्ध क्षेत्र संसार बना।चिंता के चक्कर में पड़ कर, जीवन भी है भार बना॥आजा बचपन एक बार फिर, दे दे अपनी निर्मल शांति।व्याकुल व्यथा मिटाने वाली, वह अपनी प्राकृत विश्रांति॥वह भोली सी मधुर सरलता, वह प्यारा जीवन निष्पाप।क्या आकर फिर मिटा सकेगा, तू मेरे मन का संताप।

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कठिन शब्दार्थ-झंझट = व्यर्थ का बखेड़ा। भार = बोझ। निर्मल शांति = पूर्णत: बाधारहित शांति। प्राकृत = स्वाभाविक। विश्रांति = विश्राम। निष्पाप = पापरहित। संताप = कष्ट॥

संदर्भ तथा प्रसंग-प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक में संकलित कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता ‘मेरा नया बचपन’ से लिया गया है। इस अंश में कवयित्री ने जवानी को अनेक चुनौतियों से भरा एक झंझट बताया है।

व्याख्या-कवयित्री ने माना है कि युवावस्था में नई-नई कामनाओं, पुरुषार्थ और ज्ञान की वृद्धि होती है किन्तु इस आयु में बड़े झंझट भी हैं। इस अवस्था में व्यक्ति के लिए सांसारिक जीवन, एक चुनौतियों और संघर्ष से पूर्ण रणभूमि सा नजर आता है। युवावस्था नई-नई जिम्मेदारियों के आने से मन चिंतित रहता है और कभी-कभी जीवन एक बोझ-सा प्रतीत होने लगता है। कवयित्री जवानी के झंझटों से विचलित होकर बचपन को पुकार उठती है। वह पुकार उठती है-ओ! मेरे प्यारे बचपन ! तू एक बार फिर से आजा। मेरे चिंताओं से बोझिल जीवन को फिर से अपनी निर्मल शांति से भर दे। फिर से मुझे जवानी के इस थका देने वाले मार्ग पर तू मुझे वह स्वाभाविक विश्राम प्रदान कर दे, जो मन की व्याकुलता भरी वेदना को शांत कर देता है। फिर से जीवन में उसी मधुरता भरी सरलता से भर दे। मेरे जीवन से सारे कलुषों को मिटा दे। बता, क्या तू फिर से मेरे जीवन में पधारकर, मेरे व्यथित और चिंतित मन का कष्ट दूर करेगा?

विशेष-
(i) कवियत्री ने बचपन को जीवन की सबसे सुन्दर अवधि सिद्ध किया है। जवानी भले ही अनेकानेक आकर्षक भेंटों से भरी हो, पर बचपन की निर्मल विश्रान्ति के सामने से वह कहीं नहीं ठहरती। वह युवाओं को चिंताओं और झंझटों के जाल में उलझा देती है।
(ii) कवयित्री का संकेत है कि मनुष्य चमक-दमक भरी जिन्दगी की ओर दौड़ने के बजाय बचपन जैसी सरल, सहज भोली और निष्पाप जीवन शैली को अपनाए। तभी उसे जीवन के तनावों, चिंताओं और संघर्षों से मुक्ति मिल सकती है।
(iii) भाषा लक्षणा-शक्ति सम्पन्न है। वर्णन-शैली में भावुकता का पुट है।
(iv) व्याकुल व्यथा’ में अनुप्रास अलंकार है।



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