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काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्याएँ।मैं दीवानों का वेश लिए फिरता हूँ,मैं मादकता नि:शेष लिए फिरता हूँ,जिसको सुनकर जग झूम, उठे, लहराए,मैं मस्ती का सन्देश लिए फिरता हूँ। |
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Answer» कठिन शब्दार्थ- वेश = रूप। मादकता = मस्ती, मोहकता। नि:शेष = सारी, सम्पूर्ण । झूम = प्रसन्न होकर। झुके = सम्मान दे, महत्त्व स्वीकार करे। लहराए = मस्त हो जाए। सन्देश = विचार, मन की बात॥ सन्दर्भ तथा प्रसंग-प्रस्तुते पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक में संकलित कवि हरिवंशराय बच्चन की कविता : आत्म-परिचय’ से लिया गया है। इस अंश में कवि सारे जगत को मस्ती भरे प्रेम का संदेश दे रहा है। व्याख्या-कवि कहता है कि दीवानगी केवल इसके मन में ही नहीं है, उसकी वेशभूषा से भी दीवानापन झलकता है। उसका सारा जीवन प्रेम और मस्ती से भरा हुआ है। कवि जहाँ भी जाता है, वहाँ लोगों को मस्त रहने और जीवन को अपने अनुसार जीने का संदेश देता है। उसका संदेश लोगों को गहराई से प्रभावित करता है और उसको झूमने, झुकने और मस्ती से लहराने के लिए बाध्य कर देता है। विशेष- |
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