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काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्याएँ।मैं यौवन को उन्माद लिए फिरता हूँ,उन्मादों में अवसाद लिए फिरता हूँ,जो मुझको बाहर हँसा, रुलाती भीतर,मैं हाय किसी की याद लिए फिरता हूँ। |
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Answer» कठिन शब्दार्थ- यौवन = जवानी। उन्माद = मस्ती, पागलपन। अवसाद = दुख, वेदना। बाहर = प्रकट रूप में। भीतर = मन में। संदर्भ तथा प्रसंग-प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक में संकलित कवि हरिवंश राय बच्चन की कविता से लिया गया है। कवि इस अंश में अपनी परस्पर विरोधी मनोभावनाओं को व्यक्त कर रहा है। व्याख्या-कवि कहता है कि वह युवावस्था की मस्ती या उत्साह से भरा हुआ है। उत्साह की अधिकता उसे कभी-कभी पागल-सा बना देती है। वह चाहता है कि सारा जगत् उसी की तरह उत्साह से परिपूर्ण हो जाय। वह सभी को प्रेम की शिक्षा देना चाहता है किन्तु अपने प्रयत्न में सफलता न मिलती देख उसका हृदय निराशा और वेदना से भर जाता है। कवि कहता है कि उसके हृदय में किसी अज्ञात प्रेमी की याद छिपी है। यह याद मुझे प्रकट रूप में तो हँसते रहने को विवश करती रहती है। किन्तु मेरा मन उस अज्ञात को पाने के लिए रोता रहता है। विशेष- |
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