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काव्यांशों की सप्रसंगै व्याख्याएँ।नील जल में या किसी कीगौर झिलमिल देहजैसे हिल रही हो।और ……………….जादू टूटता है इस उषा का अबसूर्योदय हो रहा है। |
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Answer» कठिन शब्दार्थ- नील = नीला। गौर = गोरी झिलमिल = रह-रहकर चमकती। देह = शरीर। जाँद = मोहक दृश्य। सूर्योदय = पूर्व दिशा में सूर्य का निकलना। संदर्भ तथा प्रसंग-प्रस्तुत काव्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक में संकलित कवि शमशेर सिंह की कविता ‘उषा’ से लिया गया है। इस अंश में कवि सूर्य के निकलने से पहले नीले पूर्वी आकाश में छा रहे सुनहले प्रकाश के दृश्य का वर्णन कर रहा है। व्याख्या- कवि कह रहा है कि सूर्योदय से पूर्व के आकाश के दृश्य को देखकर ऐसा लग रहा है जैसे नीले जल में किसी (सुंदरी) का गोरा और झिलमिलाता शरीर हिल रहा हो। विशेष- (vi) काव्यांश में ‘नील जल…………………..हिल रही हो’। कथन में उत्प्रेक्षा अलंकार है। |
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