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कौए ने खुजलाई पाँखें कई दिनों के बाद’ – कविता के संदर्भ में पंक्ति का विश्लेषण करें। |
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Answer» कवि अकाल के बाद की स्थिति को सामने लाते हैं। अकाल की भयावह स्थिति से बेचारा कौआ भी हतबुद्धि था। लेकिन झूठझू -मूठ की आशा जगते ही वह प्रबुद्ध होकर पंख खुजलाने लगा। कविता का दूसरा अंश, निम्नवर्गीय समाज की जिजीविषा और उसकी संघर्षशील प्रवृत्ति को सामने लाता है। यह बड़ी बात है कि भारतीय समाज का यह हिस्सा अत्यंत धैर्य से भरा है। वह अकाल में बेघर होता है, न जाने किन-किन कैंप-खंडहरों में शरण लेता है, फिर अपने नीड़ में लौटता है और फिर से उसका चूल्हा जलता है। यह कविता भारतीय समाज में परिवार के उस गठन को भी सामने लाती है जिसमें मनुष्य के साथ ही पशु-पक्षियों का भी बसेरा होता है। |
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