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कौशल जी ने कौन-कौन से व्यापार किए? |
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Answer» लेखक के एक मित्र कौशल जी थे। कक्षा नौ तक पढ़े फिर एक छोटा-सा प्रेस खोल दिया। साझीदार की बेईमानी के कारण प्रेस बन्द हो गया। फिर उन्होंने अपने पिता की पूँजी लगाकर बर्तनों का कारखाना खोल लिया। पत्नी बीमार हुई, तो उसको इरविन अस्पताल में दाखिल कराया। मजदूरों की लापरवाही के कारण कारखाना बन्द हो गया। उसमें भी घाटा उठाना पड़ा। उसके बाद आपने पंसारी की थोक की दुकान की। फिर रुपया बरसने लगा, पर उसमें भी लाभ नहीं हुआ और पत्नी के जेबर बेचने पड़े। कौशल जी खाली नहीं बैठ सकते थे। घर से दूर जाकर होटल खोल लिया। चला, चमका, फिर ठप हो गया। अब क्या करें? फिर वह अपने एक रिश्तेदार की सोडा वाटर की फैक्टरी में बैठने लगे। इसको छोड़कर एक बीमा कम्पनी में चले गए। खूब चमके। बीमा कम्पनी के डायरेक्टरों में कुछ झमेला मचा, तो उसे छोड़कर उन्होंने शर्बत की एक दुकान खोल ली और एक अखबार निकाला। ये दोनों काम भी चले, लेकिन टिक न सके। इसके पश्चात् आप एक कम्पनी के मैनेजर डायरेक्टर बन गए। कुछ दिन खूब सफलता मिली, परन्तु कुछ ऐसी घटनाएँ हुईं कि कम्पनी में ताला पड़ गया। अब उन्होंने पुस्तक प्रकाशन का काम आरम्भ किया। पुस्तकें छप रही थीं, बिक भी रही थीं। तभी देश स्वतंत्र हुआ। वे एक यात्रा पर गए थे। एक जाति के लोगों ने उनको उतार लिया। बहुत दिनों तक बन्दी रहे। जाने कहाँ-कहाँ भटकते रहे। बहुत दिनों बाद वह एक पत्रकार के रूप में प्रकट हुए। अब वह शांति, प्रतिष्ठा और सम्मान की व्यवस्थित जिन्दगी बिता रहे हैं। |
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