1.

Kavita:(Neer ka nirman phir phir )ka Arth

Answer»

निर्माण फिर-फिर,नेह का आह्वान फिर-फिर!वह उठी आँधी कि नभ मेंछा गया सहसा अँधेरा,धूलि धूसर बादलों नेभूमि को इस भाँति घेरा,रात-सा दिन हो गया, फिररात आ‌ई और काली,लग रहा था अब न होगाइस निशा का फिर सवेरा,रात के उत्पात-भय सेभीत जन-जन, भीत कण-कणकिंतु प्राची से उषा कीमोहिनी मुस्कान फिर-फिर!नीड़ का निर्माण फिर-फिर,नेह का आह्वान फिर-फिर!वह चले झोंके कि काँपेभीम कायावान भूधर,जड़ समेत उखड़-पुखड़करगिर पड़े, टूटे विटप वर,हाय, तिनकों से विनिर्मितघोंसलो पर क्या न बीती,डगमगा‌ए जबकि कंकड़,ईंट, पत्थर के महल-घर;बोल आशा के विहंगम,किस जगह पर तू छिपा था,जो गगन पर चढ़ उठातागर्व से निज तान फिर-फिर!नीड़ का निर्माण फिर-फिर,नेह का आह्वान फिर-फिर!क्रुद्ध नभ के वज्र दंतोंमें उषा है मुसकराती,घोर गर्जनमय गगन केकंठ में खग पंक्ति गाती;एक चिड़िया चोंच में तिनकालि‌ए जो जा रही है,वह सहज में ही पवनउंचास को नीचा दिखाती!नाश के दुख से कभीदबता नहीं निर्माण का सुखप्रलय की निस्तब्धता सेसृष्टि का नव गान फिर-फिर!नीड़ का निर्माण फिर-फिर,नेह का आह्वान फिर-फिर!



Discussion

No Comment Found

Related InterviewSolutions