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कब्जा सन्धि तथा बँटीदार सन्धि का सामान्य परिचय दीजिए।

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(1) कब्जा सन्धि: इस प्रकार की सन्धियों में दोनों अस्थियों अथवा एक अस्थि कब्जे की तरह एक ही दिशा में खुल या बन्द हो सकती है; जैसे–कुहनी या उँगली।

(2) ख़ुटीदार सन्धि: इसमें एक अस्थि या उसके प्रवर्ध धुरे की भाँति अथवा बँटे की तरह सीधी होती हैं। इन पर दूसरी अस्थि को किसी भी तरफ घुमाया जा सकता है; जैसे–कशेरुका के एक प्रवर्ध पर रखी खोपड़ी। इस प्रकार खोपड़ी दाएँ या बाएँ, किधर भी घूम सकती है।



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