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खाने के कमरे (डाइनिंग रूम) की सजावट आप कैसे करना पसन्द करेंगी और क्यों?यादेशी तथा विदेशी शैली के अनुसार खाने के कमरे (भोजन-कक्ष) की साज-सज्जा आप किस प्रकार करेंगी?याभारतीय तथा पाश्चात्य शैली के भोजन-कक्ष में क्या अन्तर है? विस्तारपूर्वक लिखिए। भोजन-कक्ष की सजावट की विधि लिखिए।

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मानव जीवन में भोजन ग्रहण करने का विशेष महत्त्व है। व्यक्ति भोजन जुटाने के लिए ही अनेक परेशानियाँ उठाता है। एक समय था, जब लोग पाकशाला या रसोईघर में ही बैठकर शान्त भाव से भोजन ग्रहण किया करते थे। उस समय जीवन सादा एवं सरल तथा कर्म व्यस्त था। आज जीवन बदल गया है। आज पाकशाला में बैठकर भोजन ग्रहण करने की सुविधा नहीं है। आधुनिक घरों में प्रायः रसोईघर काफी छोटे होते हैं; अत: वहाँ बैठकर भोजन ग्रहण करना कठिन होता है। इसके अतिरिक्त जीवन व्यस्त होने के कारण अनेक बार जूते-मोजे तथा पैंट-कोट पहने हुए ही भोजन ग्रहण करना पड़ता है। इस दशा में रसोईघर में बैठकर भोजन नहीं किया जा सकता। इन समस्त परिस्थितियों पर विचार करते हुए आजकल प्रायः सभी घरों में भोजन को अलग कमरा बनाया जाता है। इस कमरे को ही भोजन का कमरा’ या ‘डाइनिंग रूम’ (Dining room) कहा जाता है।

खाने के कमरे की सजावट

खाने के कमरे की सजावट में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण तत्त्व है-सफाई। खाने का कमरा हर प्रकार से स्वच्छ होना चाहिए। इस कमरे में संवातन तथा प्रकाश की भी समुचित व्यवस्था होनी चाहिए। खाने के कमरे की सजावट की मुख्य शैलियों या विधियों का संक्षिप्त विवरण निम्नवर्णित है

(1) परम्परागत देशी शैली-भारतीय शैली में भोजन ग्रहण करने के लिए चौकी, पटरी अथवा आसन का उपयोग किया जाता है। देशी शैली में भोजन-कक्ष में सुविधाजनक चौकी, पटरी अथवा आसन की व्यवस्था की जाती है। चौकियों पर सुन्दर-सुन्दर मेजपोश बिछाए जाते हैं। भोजन करते समय रेक्सिन अथवा प्लास्टिक के कपड़े चौकियों पर बिछाए जाते हैं। ये सुन्दर तथा आकर्षक डिजाइनों व रंगों के होते हैं और भोजन गिरने पर स्थायी रूप से गन्दे नहीं होते। दीवारों की सजावट बैठक के कमरे की अपेक्षा साधारण होती है। भोजन कक्ष में रेफ्रिजेरेटर या पानी रखने का कोई अन्य साधन भी रखा जाता है। भोजन-कक्ष प्रायः रसोईघर से जुड़ा होता है, ताकि भोजन लाने-ले-जाने की सुविधा रहे। देशी शैली में भोजन थालियों एवं कटोरियों में परोसा जाता है; अत: भोजन-कक्ष में बर्तन रखने के लिए अलमारी भी रखी जा सकती है।

(2) विदेशी शैली—इस शैली में भोजन-कक्ष में एक बड़ी मेज (डाइनिंग टेबल) तथा इसके चारो ओर बिना हत्थे वाली चार अथवा छ: कुर्सियाँ (डाइनिंग चेयर्स) लगाई जाती हैं। डाइनिंग टेबल की ऊपरी सतह पर रेक्सिन, शीशा अथवा सनमाइका लगी होती है। इसका लाभ यह होता है कि भोजन इत्यादि गिरने पर डाइनिंग टेबल को सरलतापूर्वक साफ किया जा सकता है। रेफ्रिजरेटर अथवा पानी के किसी अन्य साधन की व्यवस्था भी भोजन-कक्ष में ही की जानी चाहिए।

(3) भोजन-कक्ष निश्चित रूप से रसोईघर से जुड़ा होना चाहिए। भोजन-कक्ष में एक ओर हाथ-मुँह धोने के लिए एक वाशबेसिन लगा होना चाहिए। इसमें साबुन व स्वच्छ तौलिए की व्यवस्था होनी चाहिए। भोजन-कक्ष के दरवाजे एवं खिड़कियों पर साधारण, परन्तु स्वच्छ एवं आकर्षक परदे लगे होने चाहिए। भोजन-कक्ष की खिड़कियों पर लोहे के तार की जाली लगानी आवश्यक है। यह भोजन-कक्ष में मक्खियों को प्रवेश नहीं करने देती। दीवारों पर अच्छे-अच्छे चित्र व डाइनिंग टेबल पर पुष्पों से सज्जित फूलदान भोजन प्राप्त करने वालों के मन को प्रसन्न करते हैं।



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