| 1. |
ख्याति का अर्थ देकर उसके मूल्यांकन को असर करनेवाले तत्त्वों को समझाइए । |
|
Answer» ख्याति का अर्थ : सामान्यतः ख्याति यह धंधे की बाजार में प्रतिष्ठा का मूल्य दर्शानेवाली अदृश्य संपत्ति है। अर्थात् धंधे का अंदाजित लाभ की अपेक्षा अधिक लाभ कमाने की धंधे की प्रतिष्ठा का मूल्य ख्याति के रूप में जाना जाता है । वर्षों पहले जिस धंधे की स्थापना की गई हो उसे धंधे में समय बीतने के साथ बाजार में उसके नाम प्रतिष्ठा, उसके अच्छे संबंधो, एवं संपर्क से जो अधिक लाभ प्राप्त हो वह ख्याति के रूप में जाना जाता है । ‘लोर्ड एल्डन’ने कहा है कि, “ख्याति यह कुछ और नहीं, परंतु पुराने ग्राहक पुराने स्थल (पुरानी पेढी) से जुड़े रहें ऐसी संभावना भर है । ख्याति के मूल्यांकन को असर करनेवाले तत्त्व (Factors Affecting Valuation of Goodwill). किसी भी पेढी के ख्याति का आधार उसके द्वारा कमाये जानेवाले लाभ पर है । यदि पेढी ज्यादा लाभ कमाती है तो उसकी ख्याति भी ज्यादा होगी साथ ही साथ वह भविष्य में भी वह लाभ बरकरार रखेगी इस पर से भी आधार रहता है । इस प्रकार ख्याति के मूल्यांकन को ऐसे अलग अलग तत्त्व असर करते है जो निम्न है : (1) धंधे का स्वरूप : कितने ही धंधे में स्थान बहुत ही महत्त्व का तत्त्व गिना जाता है । कितनी ही बार धंधे का स्थान कहाँ पर आया हुआ है उस पर उसका लाभ कमाने का आधार रहता है । जिस वस्तु का ग्राहक वर्ग अधिक हो वह वर्ग जिस स्थान पर अधिक आताजाता हो उस स्थान पर उस धंधे को कमाई अधिक होती है । इस प्रकार के व्यवसायिक स्थानों की ख्याति अन्य स्थानों से अधिक होती है। (2) धंधे का स्वरूप : सामान्यतः जिस पेढ़ी का अंदाजित लाभ की अपेक्षा अधिक लाभ करने की शक्ति अधिकतम मूल्यवृद्धिवाली वस्तुओं के उत्पादन के कारण हो एवं अन्य किसी भी कारण से अधिक लाभ पेढी के द्वारा प्राप्त किया जा रहा हो वहाँ पर ख्याति रही हुई होती है। (3) धंधे का समय (वर्ष) : धंधा कितने समय से कार्यरत् है उस पर ख्याति का आधार रहा हुआ होता है। सामान्यतः धंधा जितना अधिक पुराना होगा, बाजार में उसकी प्रतिष्ठा उतनी ही अधिक होगी । उसके ग्राहक वर्ग पुराने होगें एवं धंधे का मालिक स्वयं उनसे परिचित होने से उनके आपसी संबंध गहरे होगें । जिसका लाभ माल की विक्रय वृद्धि पर होने से ऐसे व्यवसाय में ख्याति अधिक होने की संभावना बनी रहेगी। (4) बाजार की परिस्थिति : कितने ही धंधे की ख्याति उसकी बाजार की परिस्थिति पर निर्भर करती है । जिस धंधे का बाजार में एकाधिकार रहा हुआ हो अथवा स्पर्धा का प्रमाण मर्यादित हो ऐसे व्यवसाय अधिक लाभ कमा सकते है । ऐसे सभी व्यवसाय में ख्याति का मूल्य अधिक रहता है। (5) संचालकों की कार्यदक्षता : धंधे का संचालक वर्ग जितना अधिक कार्यक्षम होगा, उसका लाभ उसकी उत्पादकता वृद्धि पर होगी एवं वस्तु की लागत किंमत में कमी होगी । जिसके कारण धंधे को होनेवाला लाभ बढेगा, जो ख्याति के मूल्यवृद्धि का कारण बनेगा । (6) अन्य विशेष लाभ (तत्त्व) : कितने ही धंधे पेटन्ट के कारण भी अधिक लाभ प्राप्त कर सकते है। कितने ही धंधे उसके ट्रेडमार्क या ट्रेडनाम के कारण अधिक लाभ प्राप्त कर सकते है। ऐसे सभी धंधो की ख्याति अधिक होती है । जब पेढी के पास कोई खास प्रकार का लाभ हो जिससे उसकी लाभ करने की कार्यदक्षता में वृद्धि हो तब ख्याति अस्तित्व में है ऐसा कहा जायेगा । उपरोक्त दर्शाये गये सभी तत्त्वों के अलावा पेढी के द्वारा माल के विक्रय के बाद दी जानेवाली उच्चस्तरीय सेवा, पेढी को मजदूर एवं कर्मचारियों के साथ के आपसी संबंध एवं पेढी की अपनी खुद की भूतकाल की सिद्धियाँ भी लाभ में वृद्धि का कारण बनती है जिससे ख्याति का अस्तित्व उत्पन्न होता है। |
|