Saved Bookmarks
| 1. |
ख्याति का स्वरूप समझाइए । |
|
Answer» सामान्यतः ख्याति के स्वरूप का आधार धंधे के विक्रय पर आधारित रहा हुआ होता है। अगर धंधे का कंपनी स्वरूप में संयोजन (मिलान) किया जाये तब ख्याति के मूल्यांकन की आवश्यकता उत्पन्न होती है। जब निजी धंधे का अन्य पेढी या कंपनी में संयोजन किया जाये तब ख्याति की किंमत उत्पन्न होगी ही ऐसा नहीं होता । प्रत्येक पेढी की लाभ कमाने की क्षमता अलग-अलग हो सकती है। साझेदारी पेढी के स्वरूप में-
|
|