1.

किसी अर्द्धचालक को मादित करने से क्या तात्पर्य है? इस क्रिया से अर्द्धचालक की चालकता पर पड़ने वाले प्रभाव की व्याख्या कीजिए।

Answer»

एक ‘शुद्ध’ अर्द्धचालक, जिसमें कोई अपद्रव्य न मिला हो, ‘निज अर्द्धचालक’ कहलाता है। इस प्रकार, शुद्ध जर्मेनियम तथा सिलिकॉन अपनी प्राकृतिक अवस्था में निज़ अर्द्धचालक हैं। निज अर्द्धचालकों की वैद्युत चालकता अति अल्प होती है। परन्तु यदि किसी ऐसे पदार्थ की बहुत थोड़ी-सी मात्रा, जिसकी संयोजकता 5 अथवा 3 हो, शुद्ध जर्मेनियम (अथवा सिलिकॉन) क्रिस्टल में अपद्रव्य के रूप में मिश्रित कर दें तो क्रिस्टल की चालकता काफी बढ़ जाती है। मिश्रित करने की क्रिया को ‘अपमिश्रण’ । या ‘मादित करना’ कहते हैं। उदाहरणार्थ, 108 जर्मोनियम परमाणुओं में 1 अपद्रव्य परमाणु मिश्रित कर देने पर, जर्मोनियम की चालकता 16 गुना तक बढ़ जाती है। ऐसे अर्द्धचालकों को बाह्य अथवा अपद्रव्य अथवा अपमिश्रित अर्द्धचालक कहते हैं। इन अर्द्धचालकों में मिश्रित किये जाने वाले अपद्रव्य की मात्रा को नियन्त्रित करके इच्छानुसार चालकता अर्जित की जा सकती है।



Discussion

No Comment Found