1.

किसी विद्युत व्दिध्रुव का नेट आवेश शून्य होता हैं , लेकिन इसका व्दिध्रुव - आपूर्ण अशून्य होता हैं । बिंदु A तथा B पर स्थित (-q) तथा (+ q) आवेश के सरल निकाय के लिए चित्र से `(-q)vec(r_(1)) + (+ q) vec(r_(2)) = q(vec r_(2) - vec(r_(1))) = q vec(r) = vec (P)` = व्दिध्रुव - आघूर्ण सदिश । व्यापक रुप से यदि आवेश के वितरण में नेट आवेश शून्य हो , तो उस निकाय का व्दिध्रुव - आघूर्ण सदिश रुप से परिभाषित होता हैं : आवेश के असंतत (discrete) वितरण के लिए , `vec(P) = sum vec(r_(i) q_(i)) तथा आवेश के संतत ( continuous) वितरण के लिए , `vec(P) = int vec(r_(i))dq_(i).` XY - तल में स्थित त्रिज्या R के एक आवेशित रिंग का केंद्र - मूलबिंदु o पर स्थित हैं तथा इसके आवेश का रैखिक घनत्व `lamda`, कोण `theta` के फलन के रुप में संबंध `lamda (theta) = b cos theta` से व्यक्त होता हैं । आवेशित रिंग का विद्युत व्दिध्रुव - आघूर्ण हैं A. `pibR^(2)hati`B. `pibR^(2)hatj`C. `2pibR^(2)hati`D. `2pibR^(2)hatj`

Answer» Correct Answer - A
कोण `theta` की दिशा में अल्पांश (`Rd theta` ) पर आवेश .
अतः , परिभाषा से ,
`vec (P) = int^(vec) r dq = int_(0)^2(pi) (Rcos theta hati + R sin theta hat j) Rb cos theta . d theta` ,
`= bR^(2) int_(0)^2(pi) (cos ^(2) theta*hati + sin thetacos theta * J) d theta = (pi)bR^(2)hati.`]


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