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कंबल ओढ़े आ गई, सर्दी की बारात।चूहे जैसे दिन हुए, हाथी जैसी रात।।चली हवाएँ बर्फ़-सी, धुंध भरी है शाम।मन्नु जी रटने लगे, मूंगफली का नाम।।दाँत बजे, मुँह से धुआँ, इंजन जैसे लोग।फिर से थर्राने लगा, सारे जग को रोगसबसे प्यारी धूप है, अब मम्मी के बाद।शाले लगा चॉकलेट का स्वाद।। का सारांश लिखें। |
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