1.

कथा-नायक को किस पीड़ा ने भीतर तक झकझोर दिया ?

Answer»

चार-पांच साल पहले कथा-नायक ने मैना के चूज़े को आँगन में फेंक दिया था। वहां से बिल्ली उसे झपट ले गई थी। चूज़े के शोक में मैना पक्षियों ने देर तक आर्तनाद किया था। वर्षों के बाद साँप के काटने से कथा-नायक के प्रिय पुत्र की मृत्यु हो गई। घर में रोना-पीटना शुरू हो गया और माता होशहवास खो बैठी।

यह देखकर कथा-नायक को चिड़िया के उस बच्चे का ध्यान आया जिसे उसने आंगन में फेंक दिया था और बिल्ली उसे झपट ले गई थी। कथा-नायक के घर में सब उसी तरह हो रहा था। जैसा मैना पक्षियों तथा छौने की माता के झुंड का आर्तनाद था। उस पीड़ा की दर्दनाक स्मृति ने लेखक को भीतर तक हिला दिया।



Discussion

No Comment Found