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कठपुतली कविता में किन बुराइयों पर व्यंग्य किया गया है यह बुराइयां समाज में किस प्रकार की अवस्था पर करती हुई दिखती है उदाहरण देते हुए लिखिए

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कविता में कठपुतली अपने आगे पीछे बने धागों से परेशान हैं वह उन धागों से स्वतंत्र होना चाहती है। वह पराधीनता से तंग आ चुकी है और अपने पांव पर खड़ा होना चाहती है। कविता के माध्यम से कवि ने एक तो सामाजिक रूढ़िवादी विचारधाराओं पर व्यंग्य किया है। जो हमें पसंद नहीं है लेकिन फिर भी हम उनका पालन कर रहे हैं। जैसे:- जात-पात, छुआछूत, विधवा पुनर्विवाह न करवाना, अंधविश्वास इत्यादि | दूसरा नारी को पुरुषप्रधान समाज द्वारा अपने वश में रखना उन्हें अपनी इच्छा के अनुसार कुछ भ न करने देना है | कवि उन सारी परंपराओं को तोड़ना चाहता है लेकिन उसके मन में डर है कि अगर इन प्राचीन परंपराओं को तोड़ दिया जाए तो कहीं कुछ अचूक न हो जाए या गलती न हो जाए।



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