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कठपुतली कविता में किन बुराइयों पर व्यंग्य किया गया है? यह बुराइयाॅ समाज में किस प्रकार की अव्यवस्था उत्पन्न करती हुई दिखती हैं? उदाहरण देते हुए लिखिए।

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कविता एक व्यंग्यात्मक कविता है। जो समाज पर आधारित है। कवि ने ठीक है कहां है कि हर आदमी कठपुतली है क्योंकि सब एक दूसरे पर निर्भर शील है। जो जैसा बोलता है हम बस वैसा ही नाच देते हैं।जो गलत है यदि दूसरों के भरोसे हम चलेंगे तो फिर हम अपने लिए कब कुछ करेंगे। जब तक हम अपने विचार स्वयं नहीं लेंगे। तब तक हम कठपुतली है जो बिना मेहनत के ही चलती है।



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