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कवि ने ‘साँसों के दो तार’ किसे कहा तथा क्यों?

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कवि ने जीवन की तुलना तारों के बाजे से की है। जीवन साँसों के चलने तक उसी प्रकार चलता है जैसे तारों को छेड़ने तक उनसे संगीत की मधुर ध्वनि निकलती रहती है।



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