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कवि ‘संसार-सागर’ को कैसे पार कर रहा है?

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कवि संसाररूपी सागर से तरने के लिए पुण्यरूपी नावे को सहारा नहीं बनाता। वह तो मस्ती के साथ, लहरों के सहारे जीवन बिता रहा है।



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