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कविता का सरल अर्थ :(1) जो बीत गई …….. सो बात गई।(2) जीवन में वह था ……….. सो बात गई।(3) जीवन में मधु …. सो बात गई।(4) मृदु मिट्टी के ………. सो बात गई।

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(1) जो बीत गई …….. सो बात गई।

जो तुम पर बीती है, वह आई-गई बात हो गई है। वह बात हमेशा के लिए समाप्त हो गई है। (ऐसा मानकर उसे भूल जाना ही अच्छा है।) माना कि तुम्हारे जीवन में कोई ऐसा था, जो तारे की भाँति चमक रहा था और तुम भी उसे बहुत चाहते थे। तारे की तरह चमकता हुआ वह व्यक्ति तारे की तरह ही डूब गया (गुजर गया) तो डूब जाने दो। जो दुनिया से चला गया, उस पर शोक मत करो।

जरा आकाश के चेहरे को तो देखो। अब तक उसके जाने कितने प्रिय तारे टूट चुके हैं। जो तारे टूट गए, वे फिर आकाश से कभी नहीं मिल पाए। परंतु क्या आकाश कभी अपने उन टूटे हुए तारों पर शोक मनाता है? (जिस तरह आकाश अपने उन बिछड़े हुए तारों को भूल जाता है, उसी तरह तुम भी अपने प्रिय व्यक्ति के विछोह को भूल जाओ) क्योंकि जो बात बीत गई, वह हमेशा के लिए समाप्त हो गई।

(2) जीवन में वह था ……….. सो बात गई।

माना कि तुम्हारे जीवन में कोई ऐसा था, जो तुम्हें फूल की तरह प्रिय लगता था और तुम उस पर हमेशा न्योछावर होते थे – तुम उसकी प्रसन्नता में ही अपनी प्रसन्नता मानते थे। तुम्हारे जीवन का वह प्रिय फूल सूख गया, तो सूख जाने दो।

जरा मधुवन (बगीचे) के (मजबूत) सौने को तो देखो। अब तक मधुवन की जाने कितनी कलियाँ सूख चुकी हैं और जाने कितनी लताएँ मुरझा चुकी हैं। न ये सूखी कलियां फिर खिल सकी और न वे मुरझाई लताएं फिर हरी हो सकीं। पर क्या मधुवन अपने सूखे फूलों के लिए कभी विलाप करता है? जो बात बौत गई, वह बीत गई। उसे याद करके दुःखी होने से कोई लाभ नहीं।

(3) जीवन में मधु …. सो बात गई।

माना तुम्हारे जीवन में मदिरा का एक ऐसा प्याला था, जिस पर तुमने अपना तन-मन न्योछावर कर दिया था। अर्थात् वह तुम्हारे जीवन का एक अंग बन गया था। तुम्हारा वह मनपसंद प्याला टूट गया, तो टूट जाने दो।

जरा मदिरालय (शराबखाने) का प्रांगण तो देखो। वहाँ जाने कितने प्याले हिल जाते हैं और गिरकर टूटकर नष्ट हो जाते हैं। जो प्याले गिरकर टूट जाते हैं, क्या वे फिर उठकर वापस आते हैं? पर क्या मदिरालय को उन टूटे हुए प्यालों के लिए कभी पश्चाताप होता है? जो बात बीत गई, वह बीत गई। उसे याद करके दुःखी होने से कोई लाभ नहीं।

(4) मृदु मिट्टी के ………. सो बात गई।

मदिरा रखने के घड़े मिट्टी के बने होते हैं। इसलिए ये बहुत नाजुक होते हैं और अकसर फूट जाया करते हैं। यही हाल (मधु) प्यालों का __ भी है। इनका भी जीवन बहुत छोटा होता है। ये भी अकसर टूट जाया करते हैं। फिर भी मदिरालय के अंदर मदिरा इन घड़ों में ही रखी जाती है और लोगों को मदिरा प्यालों में ही दी जाती है।

जो लोग नशे के अभ्यस्त हैं, वे मदिरा का सेवन करते ही रहते हैं। जो व्यक्ति मदिरा के घड़ों और प्यालों के टूटने के बारे में सोचता है और उनसे उसका लगाव होता है, वह कच्चा (नौसिखिया) पियक्कड़ हैं। जो सच्चे अर्थों में मदिरा का सेवन करनेवाला होता है, वह मदिरा के घड़ों और प्यालों के टूटने पर रोता-चिल्लाता नहीं है। जो बात बीत गई, वह बीत गई। वह हमेशा के लिए समाप्त हो गई।



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