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कविता के आधार पर पराधीन भारत की जेलों में दी जानेवाली यंत्रणाओं का वर्णन कीजिए।

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कविता के आधार पर हम कह सकते है कि पराधीन भारत की जेलों में स्वतंत्रता सेनानियों को बेड़ियों और हथकड़ियों में बांधकर चोर, लुटेरों और राहजनी करनेवाले बदमाशों को छोटी-छोटी कोटरियों में रखा जाता था। जहाँ उन्हें भर पेट खाना भी नहीं दिया जाता था। सुबह से शाम तक कोल्हू चलवाया जाता था, गिट्टी तोड़वाई जाती थी और पेट पर जुआ रखवाकर कुएँ से पुरवठ द्वारा पानी खिंचवाया जाता था।

इतना सब कुछ करने के बाद भी उन्हें तरह-तरह की यातनाएँ दी जाती थीं। उन पर इतना तगड़ा पहरा रहता था कि वे आपस में मिलकर दुख-सुख की बातें भी नहीं कर सकते थे। उन्हें रोने पर भी गोलियाँ खानी पड़ती थीं।



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