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कविता के किन उपमानों को देखकर यह कहा जा सकता है कि उषा कविता गाँव की सुबह को गतिशील शब्दचित्र है? |
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Answer» ‘उषा’ कविता गाँव की सुबह का गतिशील चित्र है। कविता में प्रयुक्त उपमानों को देखकर यह बात सुनिश्चित ढंग से कही जा सकती है। भोर के नीले आकाश के लिए ‘राख से लीपा हुआ गीला चौका, ‘केसर से धुली काली सिल’ तथा ‘लाल खड़िया चाक मली हुई स्लेट’ आदि उपमान प्रयुक्त हुए हैं। राख से लिपा चौपा (रसोईघर) तथा ‘काले रंग की सिल (मसाला पीसने का पत्थर)’-ग्रामीण जीवन से लिए गए उपमान हैं। शहरी जीवन में इनका कोई स्थान नहीं है। स्लेट पर चाक से गाँव के बच्चे ही लिखते हैं, शहर के नहीं। चौके का लीपा जाना, सिल पर मसाला पीसा जाना तथा बच्चों द्वारा स्लेट पर लाल खड़िया मला जाना में एक क्रम है। इस कारण भोर का यह चित्र ग्राम जीवन से सम्बन्धित तथा गतिशील है। |
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