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कविताआ रही रवि की सवारीनव किरण का रथ सजा है,कलि-कुसुम से पथ सजा है,बादलों से अनुचरों ने स्वर्ण की पोशाकधारी।आ रही रवि की सवारी।विहग बंदी और चारणगा रहे हैं कीर्ति गायनछोड़कर मैदान भागी तारकों की फौज सारी।आ रही रवि की सवारी।चाहता, उछलूँ विजय कहपर ठिठकता देखकर यहरात का राजा खड़ा है, राह में बनकर भिखारी।आ रही रवि की सवारी।उपर्युक्त कविता के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए :1. सूर्य किस पर सवार होकर आ रहा है ?2. सूर्य के स्वागत में बादल किस तरह खड़े नजर आ रहे हैं ?3. सूर्यरूपी राजा की प्रशंसा में कौन-कौन कीर्तिगीत गा रहे हैं ?4. राह में भिखारी बनकर कौन खड़ा है ?5. ‘रात का राजा खड़ा है, राह में बनकर भिखारी’ में कौन-सा अलंकार है ?

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1. सूर्य किरणों के रथ पर सवार होकर आ रहा है ।।

2. सूर्य के स्वागत में बादल रंगीन पोशाक पहनकर खड़े नजर आ रहे हैं ।

3. सूर्यरुपी राजा की प्रसंशा में पक्षी रूपी चारण और बंदीगण कीर्तिगीत गा रहे हैं ।

4. राह में चन्द्रमा भिखारी बनकर खड़ा है ।

5. ‘रात का राजा खड़ा है, राह में बनकर भिखारी’ में अनुप्रास अलंकार है ।



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