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Kya koi mere liye ek story likh dega urgent 300 words ka bdle me mai usye kuch paise dunga |
| Answer» TION:कमेंट्स के जरिए बातें चली थी।वह मुझे पोस्ट पर कमेंट्स करतीऔर मैं उसकी पोस्ट कमेंट्स देता था ।एक दिन कमेंट्स मैसेज में बदल गएमैसेज मैसेज में ही बातें बढ़ गईंवो सवाल पर सवाल करती जाती थीमेरी आदत जवाबों में मशगूल पड़ गई ,दोस्ती का एक लिहाज़ नज़र आता थामुझे उसकी बातों में प्यार नज़र आता था ।फ्रेंड रिक्वेस्ट आकर बदल चली गईहमारी दोस्ती तो दो प्यार में चली गई ।वो दिन आ ही जाना था जबमिलने का कोई बहाना थाउसे पढ़ाई अच्छी लगती थीमैं अपने ही काम का दीवाना था ,प्यार में सोच एक जैसी हो गईएक ही कोर्स में हम दोनों की पुष्टि हो गई ।खुशियों से मिला था ये खजानाभूल गए हम रूठना मनाना ।फिर एक बार मुलाकात का मौका आयाउसने मुझे भी मिलने बुलायादेर शाम ढल चुकी थीवह एक स्थान पर आ चुकी थी,वही मुझसे भी एक गलती हो गईवो इंतज़ार में ग़मगीन हो गई ।मेरी मंजिल किसी और स्थान पर हो गईयूं समझ लो आने में देर हो गई ।मैं इधर उसकी तलाश में रहाउधर वो नाराज हो गईफिर मिले देर से मिलेसाथ में उसकी बहन से मिले ,उसकी बहन ने समझायामैंने उसे खूब समझाया ।वो नखरे दिखा रही थीमेरी बातों से वह दूर जा रही थी ।मैं यहां से कुछ दूर चला आयावहां से कुछ चॉकलेट्स ले आयाअब क्या अब तो देर हो चुकी थीवह अपने घर जा चुकी थीमैंने उस वक़्त चप्पल में थाचेहरे पर उदासीमुँह बे-धुला हुआ थाबालों में तेल नहीं,मेरा इस तरह से मिलनाकायरों के जैसे मिलना था ।शायद उसको सुंदरता चहिये थीमेरी पर्सनेलटी में चमक चाहिए थी ।मालूम न था घर उसकाअंदाज़ों में यहां वहां ढूंढाफोन लगाया उठाया नहींचॉकलेट्स पिघल कर हलवा हो गई ,घर वापस आकर वह चॉकलेट्सकिस की थी और किस की हो गई ।आंखें पानी से लाल थींयूं लगा कोई चाल थी ।दिल ग़मो में चूर होता रहामैं मैसेज पर मैसेज करता रहाकाफी रातें तन्हाई में गुजारीआंसूओं की बूंदे बिस्तर पर उतारी ,एक दिन वह फिर से मान गईमेरे दिल की बची सांसें जाग गईं ।अब मैं वही प्यार चाहता थाजुदा होने से मैं घबराता था ।उसे जॉब करने का शौक थामुझे अपने काम पर रॉब थाएक दिन उसे मेरी जरूरत पड़ गईकुछ पैसों के लिये वह मुझसे मिल गई ,मैंने मदद में देर नहीं कीऔर उसकी जॉब लग गईशायद वह मुझे भी चाहती थीजॉब पर अपने साथ चाहती थी ,मुझे मैसेज पसन्द थेउसे कॉल पसन्द थी ।मुझे उसकी फिक्र रहती थीजब वह जॉब पर रहती थी ।एक दिन हमारी क्लास शुरू हो गईउसकी जरूरत फिर शुरू हो गईमैं जाता था उसकी आस मेंवो फिर भी नहीं आई मेरी बात पे ।मैंने मदद बन्द कर दीफोन पर बात बन्द कर दी ।कॉल्स मेरे काम मे अड़ते थेजॉब पर मैसेज काम करते थे ।उसे एक स्मार्ट फ़ोन चाहिए थाइधर मेरी आर्थिक तंगी थीउधर से मैसेज आने बन्द हो गएमोबाइल के नम्बर बदलकर दो हो गएउसकी और मेरी आखिरी बात आ गई'बता तू क्या चाहती है' इस पर आ गईमैं ब्याह चाहता था मुहब्बत कावो जल्द से जल्दी सेटल पर आ गई ,'मुझसे आज के बाद बात मत करना'यूं मेरा कभी इंतजार मत करना ।आखिरी से आखिरी बात हो गईमेरी तरह वो भी तन्हा हो गई ।दो दिल फिर जुदा हो गएमैं और वो खफा हो गएराहें बदल ली हमनेचेहरे भी देखने बे-नसीब हो गए ,न नींद थी न चैन थान घर में कहीं न ज़माने मेंएक नया मोड़ आ ही गयामेरे दिल के अफसाने में ,मेने जीना सीख लियासमझकर उसकी बेवफाई को ।मेरा शायद नसीब न थासमझकर किसी का दिल गरीब को ।यही पर मेरे प्यार कीकहानी खत्म हो गईप्यार की सारी कीमतीनिशानी दफन हो गई ।अब न प्यार था न खुदाईअधूरी कहानी जाने किस रब ने बनाई ।जिंदगी जी लूं यही बहुत हैमुहब्बत में न जाने किस किस नेजान लुटाई ।किस किस ने जान लुटाई ।- गुड्डू सिकंद्राबादीहमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें | |