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क्या आप सोचते हैं कि विज्ञापन वास्तव में लोगों के उपभोग के तरीकों को प्रभावित करते है?

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विज्ञापनों का उद्देश्य विज्ञापित वस्तुओं के विक्रय को बढ़ाना है। कोई भी कंपनी विज्ञापन पर इसलिए धन व्यय करती है ताकि उसके उत्पादों का प्रचार-प्रसार हो तथा जनता तथा उसके उत्पादों के बारे में सचेत होकर खरीदने के लिए विवश हो जाए। इस उद्देश्य की पूर्ति के अतिरिक्त विज्ञापन निश्चित रूप से लोगों के उपभोग के तरीकों को भी प्रभावित करते हैं। विज्ञापनों से न केवल उत्पादों की बिक्री ही बढ़ती है, अपितु इससे लोगों की जीवन-पद्धति भी प्रभावित होती है। बहुत-से लोग नए-नए विज्ञापित उत्पादों को खरीदते हैं, उनका उपयोग करते हैं तथा इससे उनकी जीवन-शैली प्रभावित होती है। विज्ञापनों से समाज की मूल्य व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। बहुत-से विज्ञापनों में दर्शकों को आकर्षित करने हेतु स्त्रियों को अनावश्यक रूप से दर्शाया जाता है। इससे विज्ञापनों में भी स्त्रियों को शोषण होने लगता है। इस प्रकार, विज्ञापन से अर्थशास्त्र एवं समाजशास्त्र के संबंधों का पता चलता है।



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