1.

क्या आपको कभी प्रातः कालीन उषा का दृश्य देखने का अवसर मिला है। क्या आपने मन में उस दृश्य को देखकर कोई विम्ब अथवा उपमान जागे हैं? यदि हाँ तो गद्य या पद्य में अपने अनुभव को व्यक्त कीजिए।

Answer»

‘उषा’ के मनमोहक दृश्य को देखने का मुझे अनेक बार अवसर मिला है। एक अनुभव का पद्यमय रूप इस प्रकार है –
क्षितिज के नेपथ्य से
धीरे-धीरे चली आ रही,
प्राची के मंच पर,
उषा–सुंदरी।
पीछे टॅगी है नीली पिछवाई
जो गा उठे भूतल से,
स्वागत में,
विहगों के संगीतकार
और हो गया सबेरा।



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