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क्या ? – देख्न न सकती जंजीरों का गहना ?हथकड़ियाँ क्यों ? यह ब्रिटिश-राज का गहना,कोल्हू का चर्रक चूँ ? – जीवन की तान,गिट्टी पर अंगुलियों ने लिख्ने गान !हूँ मोट खींचता लगा पेट पर जूआ,खाली करता हूँ ब्रिटिश अकड़ का कूँआ।दिन में करुणा क्यों जगे, रुलानेवाली,इसलिए रात में गज़ब ढा रही आली ?इस शांत समय में,अंधकार को बेध, रो रही क्यों हो ?कोकिल बोलो तो!चुपचाप, मधुर विद्रोह-बीजइस भाँति बो रही क्यों हो ?कोकिल बोलो तो !भावार्थ : कवि कोयल से पूछता है कि हे कोयल ! क्या तुम हम स्वतंत्रता सेनानियों के हाथों की हथकड़ियाँ और पैरों की जंजीरों को देख नहीं पा रही हो ? यह ब्रिटिश साम्राज्य द्वारा पहनाया गया गहना है। सुबह से शाम तक हमें कोल्हू खींचना पड़ता हैं, उससे उत्पन्न चर्रक चूँ की ध्वनि ही हमारे जीवन का गीत बन गया है। यहाँ हम गिट्टियाँ तोड़ते हैं और हमें पेट पर जुआ रखकर पुरवठ खींचना पड़ता है। जिससे हमें लगता है कि हम ब्रिटिश सरकार के अकड़ के कुएँ को खाली कर रहे हैं।दिन में शायद करुणा को जगाने का समय नहीं मिल पाया होगा इसलिए रात में तुम अपना मधुर स्वर सुनाकर हमें ढाँढस बँधाने आई हो। रात के इस सन्नाटे में तुम अंधकार को चीरती हुई आवाज क्यों कर रही हो। क्या तुम अंग्रेजों के प्रति चुपचाप विद्रोह के बीज बो रही हो। कवि को कोयल के गीत में उम्मीद की किरण नजर आ रही है।1. ‘जंजीरों का गहना’ किसे कहा गया है ?2. जेल में स्वतंत्रता सेनानियों से क्या-क्या काम कराया जाता था ?3. ‘खाली करता हूँ ब्रिटिश अकड़ का कूआँ’ से क्या तात्पर्य है ?4. कोयल रात में क्यों गजब ढा रही है ?5. कोयल मधुर विद्रोह-बीज क्यों बो रही है ?6. ‘मधुर विद्रोह-बीज’ में कौन-सा अलंकार है ?

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1. ‘जंजीरों का गहना’ स्वतंत्रता सेनानियों को पहनाई गई हथकड़ियों को कहा गया है।

2. जेल में स्वतंत्रता सेनानियों से कोल्हू चलयाया जाता था, गिट्टी तुड़वाई जाती थी और पेट पर जुआ रखकर पुरवट द्वारा कुएँ से पानी खिंचवाया जाता था।

3. ‘खाली करता हूँ ब्रिटिश अकड़ का कूआँ’ से यह तात्पर्य है कि जेल में स्वतंत्रता सेनानियों का मनोबल तोड़ने के लिए पेट पर जुआ रखकर उनसे कुएँ से पानी खिंचवाया जाता था। परन्तु यह काम करते समय कवि को लगता है कि जुआ खींचकर वह अंग्रेजों की अकड़ का कुआँ खाली कर रहा है, अर्थात् उनकी अकड़ को चोट पहुँचा रहा है।

4. कोयल को दिन में शायद करुणा जगाने का समय नहीं मिल पाया होगा। इसलिए रात में गजब ढा रही है।

5. कोयल स्वतंत्रता सेनानियों में देश-प्रेम और देशभक्ति की भावना को मजबूत बनाना चाहती है, इसीलिए वह मधुर विद्रोह-बीज
बो रही है।

6. ‘मधुर विद्रोह-बीज’ में ‘विद्रोह-बीज’ अर्थात् विद्रोहरुपी बीज। इसलिए विद्रोह और बीज में एकरूपता के कारण सपक अलंकार है।



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