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क्या राज्य पहले की अपेक्षा आज अधिक कार्य कर रहा है या कम? आपको क्या लगता है-यदि राज्य इन कार्यों को करना बंद कर दे तो क्या होगा?

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आज राज्य पहले की अपेक्षा कहीं अधिक कार्य कर रहा है। कानून व्यवस्था बनाए रखने के अतिरिक्त राज्य बाजारी शक्तियों को नियंत्रित एवं नियमित करने तथा सामाजिक समस्याओं के समाधान में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। राज्य के कार्यों में निरंतर वृद्धि हुई है। इसका प्रमुख कारण राज्य पर कमजोर वर्गों के हितों को संरक्षण देकर उनका सामाजिक-आर्थिक उत्थान रहा है। साथ ही, परिवर्तन के परिणामस्वरूप जिन संस्थाओं में विकृतियाँ आ गई हैं उन्हें दूर करने हेतु सामाजिक अधिनियम बनाना भी राज्य का कार्य समझा जाने लगा है। यदि राज्य इन सभी कार्यों को करना बंद कर देगा तो अमीर और गरीब में अंतराल अत्यधिक बढ़ने लगेगा तथा समाज के कमजोर वर्गों के हितों की रक्षा नहीं हो पाएगी। उनका शोषण बढ़ जाएगा तथा जीवनयापन अत्यंत कठिन हो जाएगा। यदि हम अपने पड़ोस में राज्य द्वारा दी गई सुविधाओं एवं सेवाओं की एक सूची बनाएँ तो यह पहले राज्य द्वारा किए जाने वाले कार्यों से अधिक लंबी होगी।

उदाहरणार्थ- इस सूची को विद्यालय से ही प्रारंभ किया जा सकता है। पहले जो विद्यालय थे उनमें निम्न जातियों के बच्चों को प्रवेश नहीं दिया जाता था। अधिक फीस होने के कारण केवल अमीर परिवारों के बच्चे ही शिक्षा ग्रहण कर सकते थे। अब यदि कोई विद्यालय ऐसा करता है तो उसकी न केवल सरकारी सहायता बंद कर दी जाती है, अपितु इस कार्य हेतु उसे बंद भी किया जा सकता है। स्कूलों में भवन का निर्माण सरकारी धन से होता है, प्राध्यापकों एवं अन्य कर्मचारियों का वेतन सरकार देती है, बच्चों से बहुत कम फीस ली जाती है, अनुसूचित जाति/जनजाति के बच्चों को छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है, यदि बुक बैंक योजना है तो छात्र-छात्राओं को पुस्तकें भी उपलब्ध कराई जाती हैं तथा कमजोर वर्गों के छात्रों के लिए मुफ्त में अतिरिक्त कक्षाओं का प्रबंध किया जाता है।

यदि किसी विद्यालय में अनुसूचित जाति/जनजाति हेतु ‘आरक्षित स्थानों का पालन नहीं किया जाता तो उस विद्यालय के विरुद्ध कठोर शासकीय कार्यवाही की जा सकती है। इसी भाँति, यदि हम अपने पड़ोस में सरकार द्वारा किए जाने वाले कार्यों की सूची बनाएँ तो यह पहले की तुलना में काफी लंबी होगी। गलियों में प्रकाश की व्यवस्था, घरों में बिजली-पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था, गंदगी की निकासी हेतु सीवर की व्यवस्था, बच्चों के खेल एवं मनोरंजन के लिए-पार्को की व्यवस्था, समय-समय पर टूटी सड़कों एवं गलियों की मरम्मत करने या उन्हें फिर से नया बनाने की व्यवस्था राज्य द्वारा ही की जाती है। इतना अवश्य है कि सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं से सभी लोग कभी भी संतुष्ट नहीं होते हैं। कुछ लोग इन्हें अपर्याप्त मानकर सरकार एवं संबंधित सरकारी विभाग की आलोचना भी करते रहते हैं। हो सकता है कि कार्य समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण उनकी आशा के अनुकूल न हो रहा हो।



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