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क्यों हूक पड़ी ?वेदना बोझ वाली-सी;कोकिल बोलो तो !क्या लूटा ?मृदुल वैभव की रनवासी-सी,कोकिल बोलो तो !क्या हुई बावली ?अर्द्धरात्रि को चीखी,कोकिल बोलो तो !किस दावानल की ज्वालाएँ हैं दीखीं ?कोकिल बोलो तो !भावार्थ : कवि ने कोयल की वेदनापूर्ण आवाज सुनकर पूछा कि हे कोयल ! तुम इस तरह क्यों चीख रही हो ? तुम्हारी वेदना भरी आवाज से लगता है, जैसे तुम्हारा संसार ही लुट गया हो। तुम्हारे पास तो मीठी आवाज़ का खजाना है। फिर इस तरह आधी रात को तुम पागलों की तरह क्यों चीख रही हो ? हे कोयल ! मुझे कुछ बताओ तो सही। कहीं तुमने जंगल में उत्पन्न होनेवाली आग की ज्वालाएँ तो नहीं देख ली, जिसके कारण तुम्हारे मुख से चीख निकल पड़ीं।1. कवि को कोयल की हूक कैसी लग रही है ?2. कवि ने कोयल की आवाज कब सुनी ?3. कवि को कोयल की बोली दर्दभरी क्यों लग रही है ?4. कवि ने कोयल को बावली क्यों कहा है ?5. ‘वेदना बोझवाली-सी’ में कौन-सा अलंकार है ?

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1. कवि को कोयल की हूक दर्दभरी लग रही है।

2. कवि ने कोयल की आवाज आधी रात को सुनी।

3. कोयल के पास मीठी बोली का खजाना है। वह पूरे दिन अपनी मीठी आवाज से लोगों के दिलों पर राज करती है, परन्तु
वही कोयल असमय आधी रात को क्रंदन कर रही है, इसलिए उसकी बोली दर्दभरी लग रही है।

4. कवि ने कोयल को बावली इसलिए कहा है कि वह असमय आधी रात में कूक रही है। इस समय उसकी कूक सुननेवाला कौन है, सारा संसार तो सोया है। यदि उसे अपना संदेश लोगों तक पहुँचाना है तो दिन के समय बोलना चाहिए।

5. ‘वेदना बोझवाली-सी’ में उपमा अलंकार है।



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