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लेखक अपने आप को दुर्भागी क्यों समझते हैं ?

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लेखक बापू के आदेश पर स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े थे। पढ़ाई छोड़कर अपना पूरा जीवन देश की आज़ादी के प्रति समर्पित कर दिया था। इसके लिए कई बार उन्हें संकटों का सामना करना पड़ा। बापू के प्रति उनके मन में अपार श्रद्धा थी. पर बापू के जीवनकाल में वे उनके आवास पर पहुंचकर उनके दर्शन न कर सके। लेखक इसके लिए अपने आप को दुर्भागी समझते हैं।



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