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लेखक को गोदावरी का जल कैसा लगा होगा ?

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  • लेखक गोदावरी नदी के जल में गंगा, सिंधु, शोणभद्र, ऐरावती जैसी महानदियों के विशाल प्रवाह भर कर देखे होंगे।
  • बादलों का रंग साँवला होने के कारण गोदावरी के धूलि – धूसरित मटमैले जल की झाँई और भी गहरी दिखाई दे रही थी।
  • लेखक को लगा होगा कि इतना सारा पानी कहाँ से आता होगा?
  • गोदावरी का अखंडप्रवाह पहाडों में से निकल कर अपने गौरव को साथ में लिये आता हुआ दिखाई पडा होगा।
  • नदी के पानी में उसे उन्माद दिखायी दिया था। उसमें लहरें न थी।
  • लेखक को गोदावरी धीर गंभीर माता जैसे लगी। लेखक को लगा होगा कि गोदावरी के जल में अमोघ शक्ति है।


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