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लेखक ने गुलमर्ग के दिन को वाचाल क्यों कहा?

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गुलमर्ग में रात आते ही सबकुछ खामोश हो जाता है। दिन में सैलानियों के कारण वहाँ बहुत चहल-पहल रहती है। इसलिए लेखक ने गुलमर्ग के दिन को वाचाल कहा।



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