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लेखक ने रेल के पहिये की आवाज़ को “संक्रामक’ कहा है। ‘संक्रामक’ से लेखक का क्या आशय होगा? |
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Answer» रेल के पहिये की आवाज़ तो पुर की विजय नाद की तरह दूर – दूर तक फैलता है गंगा जल गोदावरी में उँडेलना, गोदावरी के जल को लेना भव्य विधि है। विभिन्न प्रांत और संस्कृतियों को मिलानेवाली है। भव्य विधि को फैलाने वाली है। |
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