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‘लहनामिंह की स्थिति परकटे पक्षी की तरह है जो उड़ना चाहता है पर विवश है।’ स्पष्ट कीजिए। |
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Answer» परकटा पक्षी डैनों के अभाव में उड़ने में असमर्थ होता है। यही स्थिति लहनासिंह की है। वह जर्मनों पर धावा करना चाहता है किन्तु बड़े अफसर का आदेश नहीं था। खन्दक में पड़े-पड़े हइडियाँ अकड़ गई हैं। वह कहता है कि मार्च का हुक्म मिल जाता तो अकेला ही सात जर्मनों को मार दें। जर्मनी के सिपाही कायर हैं, संगीन देखते ही मुँह फाड़ देते हैं। वैसे छिपकर वार करते हैं। एक बार धावा किया था तो चार मील तक जर्मनों को खदेड़ दिया था। किन्तु अब क्या करे। अफसर आक्रमण करने का आदेश ही नहीं देते। सिपाही होने के कारण लड़ने का जोश आता है। पर आदेश के अभाव में सारे अरमान ठण्डे पड़ जाते हैं। वास्तव में उसकी स्थिति परकटे पक्षी की ही थी। |
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