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लकड़ी रबड़ आदि में मुक्त इलेक्ट्रॉन उपलब्ध नहीं होते अतः ये धारा के कुचालक होते है जबकि पृथ्वी एवं मनुष्य के शरीर धारा के सुचालक है । मनुष्य के शरीर से mA से अधिक धारा प्रवाहित होने पर नुकसान पंहुचा सकती है । धारा किसी वास्तु या पिंड से होकर तभी प्रवाहित होगी जबकि उसका परिपथ पूर्ण हो । उपरोक्त परिच्छेद को पढ़कर निम्न प्रश्नो के उआतर दीजिए - (ii ) 10 mA से अधिक धारा मनुष्य को क्यों नुकसान पहुँचाती है ? |
| Answer» 10 mA से अधिक धारा यदि मनुष्य के शरीर से होकर गुजरेगी तो वह मनुष्य के शरीर की नसों से प्रवाहित होकर संपूर्ण शरीर को नुकसान पहुचायेगी अर्थात का झटका जो घातक हो सकता है । | |