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Locjtantra ke vepaksh me tark |
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Answer» लोकतंत्र परिवर्तन के लिए हमेशा तैयार रहता है…हां, थोड़ी ना नुकुर करता है लेकिन अंत में मान ही जाता है …ना केवल अपने शासक बदलने के लिए बल्कि अपने विचार, अपनी व्यवस्था और अपनी संस्थाओं को बदलने के लिए… अर्थव्यवस्था में, हर तरह क राजतंत्र में, यह किसी भी दूसरे शासन व्यवस्था में, अंतिम शक्ति का स्रोत, धन का स्रोत तो जनता ही होती है और निर्णय तो अंततः जनता को ही करना होता है.. कभी जनता खामोश रहती है, कभी अपना मत जाहिर कर देती है, कभी विद्रोह कर देती है, कभी शासकों की हत्या कर देती है, लेकिन जो भी करती है अंततः जनता ही करती है..शासक तो हमेशा भ्रम में बैठी रहती हैं कि वह कर रही… लोकतंत्र अधिक तो कुछ नहीं करता लेकिन वह यह स्वीकार करता है कि अंतिम शासक जनता है अप्रत्यक्ष रूप से उसे यह अधिकार भी दे देता है कि वह अपने शासकों को चुनें भी , धमकाए भी और हटाए.. लोकतंत्र व्यक्ति को महत्व देता है उसकी स्वतंत्रता का आदर करता है और मनुष्य के लिए तो स्वतंत्रता ही दुनिया का सबसे बड़ा सुख है.. लोकतंत्र अपने गुस्से को भी दिखाने की पूरी आजादी देता है …साथ- साथ लोकतंत्र में जनता के गुस्से को आदर की नजर से देखा जाता है … Please MARK as BRAINLIEST |
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