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लोकतन्त्र के विस्तार के कारणों को स्पष्ट कीजिए।

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यह सामान्य धारणा है कि विश्व में लोकतन्त्र के प्रसार का प्रमुख कारण यह है कि लोग अन्य शासन प्रणालियों की तुलना में लोकतन्त्र को श्रेष्ठ मानते हैं। साथ ही लोगों ने राजतंत्र, औपनिवेशिक तन्त्र तथा तानाशाही व्यवस्था से मुक्ति एवं लोकतंत्र की स्थापना के लिए लम्बे समय तक संघर्ष किया है, क्योंकि इससे उन्हें सामान्य मानवाधिकार की भी प्राप्ति होती है। लोकतंत्र की स्थापना एवं विस्तार में किसी देश की सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक परिस्थितियाँ भी उत्तरदायी होती हैं।इसके अतिरिक्त कई बार बाहरी परिस्थितियों ने भी एक देश में लोकतन्त्र की स्थापना में योगदान दिया है। 

इनमें प्रमुख हैं-

⦁     द्वितीय विश्व युद्ध,
⦁    उपनिवेशवाद की समाप्ति (End of Colonialism) तथा
⦁     सोवियत संघ का विघटन।

परन्तु यह बात ध्यान देने योग्य है कि लोकतंत्र की स्थापना में बाहरी परिस्थितियाँ केवल उसी समय सहायक होती हैं जब देश के अन्दर भी इसके लिए परिस्थितियाँ मौजूद होती हैं।
हाल ही में विश्व के कुछ शक्तिशाली देशों (संयुक्त-राज्य अमेरिका) ने भी लोकतन्त्र की स्थापना को प्रोत्साहित किया है। कई बार तो शक्तिशाली देशों ने अलोकतान्त्रिक राज्यों पर आक्रमण करके भी वहाँ पर लोगों को तानाशाही शासन से छुटकारा दिलाने तथा लोकतंत्र की स्थापना करने का प्रयत्न किया है। संयुक्त-राज्य अमेरिका द्वारा इराक पर आक्रमण इसका एक जीताजागता उदाहरण है।

कई बार अलोकतंत्रीय राज्यों के विरुद्ध आर्थिक प्रतिबन्ध (Economic sanctions) लगाकर उन्हें लोकतन्त्र की स्थापना करने के लिए मजबूर किया जाता है। पाकिस्तान तथा नाइजेरिया के विरुद्ध इस प्रकार की कार्यवाही की गयी थी, परन्तु लोकतन्त्र की स्थापना का यह उचित तरीका नहीं है।

वास्तव में बाहरी परिस्थितियाँ केवल उसी समय लाभकारी हो सकती हैं जब आंतरिक परिस्थितियाँ इसके लिए अनुकूल हों अन्यथा बाहरी हस्तक्षेप बहुत ही खतरनाक साबित हो सकता है। अतः सैनिक शक्ति के बल पर किसी अन्य देश के नागरिकों को लोकतन्त्र का तोहफा देना स्वयं लोकतंत्र की भावना के विरुद्ध है।



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