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लोकतन्त्र में चुनावों का क्या महत्त्व है?

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लोकतन्त्र में चुनावों का बड़ा महत्त्वपूर्ण स्थान है। आज का लोकतन्त्र अप्रत्यक्ष या प्रतिनिध्यात्मक लोकतन्त्र है और जनता अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा ही शासन में भाग लेती है तथा अपनी प्रभुसत्ता का उपयोग करती है। आज के राष्ट्र-राज्यों में निर्वाचनों के अतिरिक्त और कोई उपाय नहीं है जिसके माध्यम से जनता शासन में भाग ले सके। चुनावों से लोगों को राजनीतिक शिक्षा भी मिलती रहती है और इन्हें देश के सामने आने वाली तात्कालिक समस्याओं तथा विभिन्न राजनीतिक दलों की नीतियों तथा कार्यक्रमों का निरन्तर ब्यौरा प्राप्त होता रहता है। चुनावों के कारण जनता के प्रतिनिधि भी अपने उत्तरदायित्व को अनुभव करते हैं और कोई कार्य जनमत के विरुद्ध करने की हिम्मत नहीं कर सकते, क्योंकि उन्हें शीघ्र ही चुनावों के दिनों में जनता के सामने वोट माँगने जानी पड़ता है। उन्हें यह भय बना रहता है कि यदि उन्होंने जनमत की अवहेलना की तो उन्हें दुबारा चुने जाने की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए। इस प्रकार प्रतिनिधि उत्तरदायी बने रहते हैं और मनमानी नहीं कर सकते। इन सभी तथ्यों से स्पष्ट है कि लोकतन्त्र में चुनावों का अत्यधिक महत्त्व है। हम चुनाव के बिना लोकतन्त्र की कल्पना भी नहीं कर सकते।



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