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मानव जीवन में कितनी संभावनाएँ छिपी हैं, इसकी कोई सीमा नहीं है। पशु से लेकर देवत्व तक की सारी सीढ़ियाँ मानवीय चोले में से होकर गुजरती है। शर्त एक ही है – उसके लिए चुनौती चाहिए। बिना चुनौती के वे सारी संभावनाएँ सोई रहती हैं। संसार में जितने भी पैगंबर या अवतार हुए हैं, वे सब अपने-अपने समय की चुनौतियों के उत्तर हैं। हरेक युग की अपनी चुनौतियाँ होती हैं, जन सामान्य इन चुनौतियों को न तो पहचान पाता है, न उनका सामना करने की सामर्थ्य जुटा पाता है। पर जो तेजस्वी पुरुष उन चुनौतियों को पहचान कर उनका उत्तर देने के लिए मैदान में कूद पड़ता है लोग उसे ‘महापुरुष’ कहकर स्वयं उसका अनुगमन करने को तैयार हो जाते हैं। संसार में ज्ञान-विज्ञान की जितनी भी उन्नति हई है. उन सबके मल में भी वही चुनौतियों वाली बात है। मनुष्य के मन में कुछ प्रश्न पैदा होते हैं, उन प्रश्नों का उत्तर देने के लिए वह अपनी बुद्धि का प्रयोग करता है। .. फिर कुछ नए प्रश्न पैदा होते हैं, वह फिर उनका उत्तर देने का प्रयत्न करता है – और यों ज्ञान-विज्ञान की दृष्टि से मानव-कोश में वृद्धि होती चली जाती है।1) मानव जीवन में चुनौतियों का क्या महत्व है?2) उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए।3) ‘सामान्य पुरुष’ और ‘तेजस्वी पुरुष’ में क्या अंतर होता है?4) ज्ञान-विज्ञान की दृष्टि से मानव-कोश में किस प्रकार वृद्धि होती रहती है?5) किसके बिना सारी संभावनाएँ सोई रहती है?

Answer»

1) चुनौतियाँ ही मनुष्य जीवन की अनंत संभावनाओं को सामने लाती हैं। चुनौतियाँ ही महापुरुषों एवं पैगम्बरों को सामने लाती हैं।
2) ‘चुनौतियाँ एवं मानव जीवन’।
3) ‘सामान्य पुरुष’ न तो चुनौती को पहचान पाता है और न ही हिम्मत जुटा पाता है लेकिन “तेजस्वी पुरुष’ उन चुनौतियों को पहचानकर उसका सामना करता हैं।
4) मनुष्य के सामने जो प्रश्न पैदा होते हैं, उन प्रश्नों का वह अपनी बुद्धि से उत्तर देता है। इस प्रकार ज्ञान-विज्ञान की दृष्टि से मानव-कोश में वृद्धि होती है।
5) चुनौती के बिना सारी संभावनाएँ सोई रहती है।



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