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मानव को ईश्वर बनना था, निखिल सृष्टि वश में लानी,काम अधूरा छोड़कर रहा आत्मघात मानव ज्ञानी।सब झूठे हो गये, निशाने, तुम मुझसे छूटे तो क्या ! |
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Answer» प्रस्तुत पंक्तियों नरेन्द्र शर्मा की ‘युग और मैं’ कविता से ली गई हैं। इनमें कवि ने बताया है कि मनुष्य किस तरह अपनी प्रगति की राह से भटककर गुमराह हो गया है। मनुष्य ने विज्ञान के क्षेत्र में अनोखी सिद्धियाँ प्राप्त कर ली हैं। इन सिद्धियों के बल पर वह स्वयं को ईश्वर समझने लगा। ऐसी सिद्धियोंवाले देश सारी दुनिया पर अपना अधिकार करने के फेर में पड़ गए। उन्होंने ईश्वर बनने की राह छोड़ दी और अपना ही विनाश करने लगे। कवि कहता है कि जब सबने अपनी राह छोड़ दी तो मैं अगर भटक गया तो इसमें मेरा क्या दोष? |
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